
बोले रांची: रजत जयंती पर युवाओं को चाहिए राज्य में ‘स्वर्ण’ अवसर
संक्षेप: झारखंड राज्य इस वर्ष अपने गठन का 25वां स्थापना दिवस मना रहा है। राज्य के युवाओं ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता है। कॉलेज के विद्यार्थियों ने आवागमन में परेशानी और उच्च शिक्षा के लिए पर्याप्त संस्थानों की कमी पर चिंता जताई। सरकार से विशेष बस सेवा और सरकारी कॉलेजों की मांग की गई है।
रांची, संवाददाता। झारखंड राज्य इस वर्ष अपने गठन का 25वां स्थापना दिवस यानी रजत जयंती मनाने जा रहा है। राज्य के युवाओं का कहना है कि 25 वर्ष में राज्य में कई प्रकार के सुधार हुए। लेकिन, शिक्षा के क्षेत्र में और सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए राज्य में उचित व्यवस्था होनी चाहिए। कॉलेज के विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें आवागमन करने में परेशानियां होती हैं। सरकार विद्यार्थियों के लिए विशेष सिटी बस और ग्रामीण बस की व्यवस्था कराए। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए राज्य में पर्याप्त सरकारी कॉलेज स्थापित किए जाएं।

उन्होंने कहा कि युवाओं के सपने पूरे करने के लिए विशेष पहल करनी की जरूरत है। युवाओं के ये सपने अभी भी अधूरे बिहार से अलग कर झारखंड राज्य का गठन किया गया। झारखंड के निवासियों ने इस उम्मीद के साथ अपने नए राज्य की स्थापना का जश्न मनाया कि अब उनके सारे सपने पूरे होंगे। उन्हें शिक्षा, रोजगार, उद्योग, कला-संस्कृति और एक विकसित राज्य के लिए मजबूत आधारभूत संरचना जैसी तमाम सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इस वर्ष राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन युवाओं के ये सपने अभी भी अधूरे हैं। शिक्षण संस्थानों में उच्च स्तरीय अनुसंधान की सुविधाएं उपलब्ध नहीं युवाओं ने कहा कि राज्य के युवा इस बात से परेशान हैं कि उसके लिए झारखंड में उच्च शिक्षा प्राप्त करने और करियर बनाने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं हैं। शिक्षण संस्थानों में उच्च स्तरीय अनुसंधान की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। एक ओर शिक्षक व विद्यार्थियों का अनुपात सही नहीं है, वहीं जहां भवन है वहां शिक्षक नहीं, जहां शिक्षक हैं वहां आधारभूत सुविधाएं नहीं हैं। लेकिन, अभी उम्मीदों की उड़ान थमी नहीं है। राज्य के युवा बेरोजगारी से परेशान हैं। इन्हें रोजगार देने की आवश्यकता है। शिक्षक व विद्यार्थियों का अनुपात असंतुलित युवाओं ने कहा कि राज्य में उच्च शिक्षा की स्थिति और बेहतर होनी चाहिए। राज्य के कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षक व विद्यार्थियों का अनुपात असंतुलित हैं। कहीं भवन तो हैं, लेकिन शिक्षकों का अभाव है। वहीं कई जगहों पर शिक्षक तो हैं, मगर मूलभूत शैक्षणिक सुविधाओं का अभाव है। प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, इंटरनेट कनेक्टिविटी और अनुसंधान की आधुनिक सुविधाओं की कमी हैं। इस वजह से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पाती है। राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों में अनुसंधान नहीं हो रहे हैं। विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में झारखंड राज्य धीरे-धीरे पीछे होता जा रहा है। राज्य में इंजीनियरिंग, मेडिकल और प्रबंधन संस्थानों की संख्या सीमित है। जो संस्थान कार्यरत हैं, उनमें भी उपकरणों, फैकल्टी और प्रयोगात्मक शिक्षण की कमी देखी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी नजर डालें तो विद्यालयों की स्थिति अच्छी नहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी नजर डालें तो विद्यालयों की स्थिति अच्छी नहीं है। कई इलाकों में तो विद्यालय तक नहीं हैं, जहां विद्यालय है वहां न तो पर्याप्त शिक्षक हैं, न ही पठन-पाठन के लिए अनुकूल वातावरण। इस वजह से इन इलाकों से पढ़कर निकलने वाले विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि पहले से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिलने की वजह से छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। युवाओं का कहना है कि आज के समय में हमें आधुनिक शिक्षा नहीं मिलना रोजगार से वंचित होना है। इसलिए, शुरुआत से ही सभी को आधुनिक शिक्षा मिलनी चाहिए। युवाओं ने कहा कि राज्य में उच्च तकनीकी शिक्षा की व्यवस्था व गुणवत्ता नहीं होने की वजह से छात्र अन्य राज्य में विस्थापित हो रहे हैं। इसका सीधा असर युवाओं के करियर पर पड़ा है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को राज्य से बाहर पलायन करना पड़ता है। दिल्ली, पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहर झारखंड के युवाओं के लिए शिक्षा के केंद्र बन गए हैं। हर विद्यार्थी के पास बाहर जाकर पढ़ने की आर्थिक क्षमता नहीं होती। इस वजह से कई मेधावी विद्यार्थियों के सपने अधूरे रह जाते हैं। सुझाव 1. राज्य में उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के लिए पर्याप्त संस्थान का निर्माण किया जाए। 2. सरकार विद्यार्थियों के आवागमन करने के लिए विशेष बस की सुविधा शुरू करे। 3. सरकारी अस्पतालों की स्थिति और व्यवस्था में जल्द से जल्द सुधार किए जाएं। 4. ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों में पर्याप्त विद्यालय हो व आधारभूत संरचना उपलब्ध कराए जाएं। 5. राज्य के सभी शिक्षण संस्थानों में आत्मरक्षा के लिए प्रशिक्षण को अनिवार्य किया जाए। 6. स्कूल और कॉलेज की छात्राओं को आत्मरक्षा के लिए प्रशिक्षण दिया जाए। 7. सरकारी विद्यालयों में कला-संस्कृति व खेलकूद में विद्यार्थियों को आगे बढ़ाया जाए। 8. सरकार समय-समय पर सरकारी नियुक्तियां उपलब्ध कराए, जिससे बेरोजगारी कम हो। 9. राजनीति में भी पात्रता निर्धारित की जानी चाहिए। 10. राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षक और विद्यार्थियों का अनुपात संतुलित किया जाना बहुत जरूरी है। हुनर आधारित शिक्षा मिले झारखंड के 25वें स्थापना दिवस पर राज्य में उम्मीद की नई किरण है। झारखंड में प्रत्येक छात्र गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें। शिक्षक-शिक्षण अनुपात सुधरे। ग्रामीण सुदूरवर्ती आदिवासी क्षेत्रों में स्कूल की पहुंच व्यापक हो, ताकि सभी छात्राओं को शिक्षा मिल सके। विद्यार्थियों को हुनर आधारित पाठ्यक्रम और मातृभाषा में शिक्षा को बल मिले। -डॉ विनय भरत, विभागाध्यक्ष अंग्रेजी विभाग, डीएसपीएमयू शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी हम पीछे हैं। ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। विद्यालयों में आधारभूत संरचना नहीं है। बच्चों को शुरुआत से ही सही शिक्षा नहीं मिलने की वजह से आगे चलकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए शहर आना पड़ता है। इससे हम विद्यार्थियों को समस्याएं होती है। शिक्षा के क्षेत्र में राज्य को पहल करने की जरूरत है। -ज्योत्सेना कुमारी शिक्षा ग्रहण करने के लिए विद्यार्थी दूर-दराज क्षेत्रों से शहर आते-जाते हैं। सरकार आवागमन के लिए सिटी बस की व्यवस्था करे। -आकृति हमारे राज्य के विकास के लिए शिक्षित राजनीतिक व्यक्ति की जरूरत है, ताकि राज्य का संपूर्ण विकास हो सके। -पूर्णिमा प्राथमिक शिक्षा नीति में सुधार किया जाए। ग्रामीण इलाकों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए ग्रामीण बस सेवा में विशेष छूट मिले। -सचिन महतो झारखंड के सरकारी अस्पतालों की स्थिति आज भी बेहद दयनीय है। राज्य में स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता है। -सिद्धि मिश्रा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए सरकारी कॉलेज व विश्विद्यालय नहीं होने से हमें निजी कॉलेज में नामांकन लेना पड़ता है। -डॉली कुमारी राज्य चारों ओर अपनी प्रकृति व हरियालियों के लिए जाना जाता है, लेकिन विकास के नाम पर पेड़ कटते चले जा रहे हैं। -लक्की कुमारी सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की स्थिति में सुधार की जाए। कला-संस्कृति व खेलकूद के क्षेत्रों में विद्यार्थियों को आगे बढ़ाया जाए। -आशीष कुमार छात्राओं के साथ कॉलेज आवागमन करने के दौरान छेड़खानी की घटनाएं होती हैं। सभी कॉलेजों में सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाए। -सृष्टि कुमारी राज्य में सरकार की ओर से सरकारी नौकरियों के लिए समय पर नियुक्तियां नहीं होने की वजह से बेरोजगारी से परेशान हैं। -अनुष्का सरकार एक ओर समानता की बात करती है, तो आरक्षण देकर भेदभाव क्यों करती है। आय के हिसाब से आरक्षण मिले। -अंशिका राज्य में पर्याप्त मात्रा में सुविधा नहीं होने से युवा बाहर रोजगार की तालाश में चले जाते हैं। रोजगार व राज्य के विकास पर ध्यान दें। -अंजलि सरकारी नौकरियों में जिस प्रकार से पात्रता निर्धारित की गई है, उसी प्रकार से राजनीति में भी पात्रता निर्धारित होनी चाहिए। -विद्यांशी जयसवाल

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