दिल्ली स्थित झारखंड भवन का उठा मामला, समीक्षा करेगी सरकार

दिल्ली स्थित झारखंड भवन का उठा मामला, समीक्षा करेगी सरकार

संक्षेप:

झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन, पर्यटन विकास और निबंधन संशोधन विधेयक 2025 पारित किया गया। विपक्ष ने दिल्ली में झारखंड भवन में आवास की समस्या उठाई, जहां केवल विधायकों के रिश्तेदारों को ठहरने की अनुमति है। संसदीय कार्य मंत्री ने इस व्यवस्था की समीक्षा का आश्वासन दिया।

Dec 10, 2025 07:35 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रांची
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रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन बुधवार को सदन की कार्यवाही प्रश्नकाल से शुरू हुई। इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष ने कई मुद्दों पर सवाल उठाए। झारखंड पर्यटन विकास और निबंधन संशोधन विधेयक 2025 पारित हो गया। वहीं, पूर्व में पारित चार विधेयक वापस लिए गए। सदन की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने दिल्ली स्थित ऊर्जा विभाग के गेस्ट हाउस व दो-दो झारखंड भवन में आवासन का मामला उठाया। उन्होंने सदन को बताया कि मंत्रिमंडल निगरानी एवं सचिवालय विभाग ने आदेश जारी किया है, जिसके तहत अब झारखंड भवन में विधायक के सगे-संबंधी ही रह सकते हैं।

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मंत्रिमंडल निगरानी सचिवालय का यह फैसला सही नहीं है। स्पीकर से मांग है कि 5 वर्ष का रजिस्टर मंगाएं और देखें कि वहां कौन-कौन ठहरा है। हमारे क्षेत्र के लोग भी दिल्ली में काम से जाते हैं। आवास कौन आवंटित करता है, कौन सा काम होता है, इसकी जांच होनी चाहिए। अधिकारियों के सगे संबंधी झारखंड भवन में ठहरें, यह सही नहीं है। विधायक जनप्रतिनिधि होता है। क्षेत्र की जनता भी किसी न किसी कार्य से दिल्ली जाती है, लेकिन उनके लिए झारखंड भवन में जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा विभाग के गेस्ट हाउस के लिए पांच लाख रुपये प्रतिवर्ष खर्च होते हैं। दो-दो झारखंड भवन भी वहां हैं, जिसपर जनता की गाढ़ी कमाई खर्च हो रही है और उन्हें ही ठहरने से वंचित किया जा रहा है। इससे संबंधित प्रतिबंध अविलंब हटाने की आवश्यकता है और ऊर्जा विभाग के गेस्ट हाउस व दोनों झारखंड भवन में क्षेत्र की जनता को ठहराने की व्यवस्था कराने की जरूरत है। इस पर संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन को आश्वस्त किया कि ऐसा निगरानी विभाग ने कैसे किया, यह देखना पड़ेगा। इस प्रकार की व्यवस्था कैबिनेट की स्वीकृति से ही हो सकता है। वहां क्षेत्र की जनता के ठहरने पर रोक नहीं होनी चाहिए। सरकार इसकी समीक्षा करेगी।