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रांची

जैक बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा हो सकती है रद्द

हिन्दुस्तान टीम,रांचीPublished By: Newswrap
Thu, 20 May 2021 10:50 PM
जैक बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा हो सकती है रद्द

एक जून को फैसला ::::::::::::::::::::::::

- कोरोना की तीसरी लहर की आशंका पर परीक्षा रद्द करने पर हो सकता है निर्णय

- नौवीं का रिजल्ट ही बन सकता है आधार, 97 फीसदी रहा था परीक्षा फल

रांची। हिन्दुस्तान ब्यूरो

सीबीएसई और आईसीएसई की तर्ज पर झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) की मैट्रिक की परीक्षा भी रद्द हो सकती है। कोरोना के बढ़ते मामले और बच्चों को प्रभावित करने वाली संभावित तीसरी लहर को देखते हुए सरकार इस पर निर्णय ले सकती है। इस पर एक जून को बैठक होनी है, जिसमें मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा को लेने या नहीं लेने पर अंतिम फैसला होगा।

मैट्रिक और इंटरमीडिएट किसी भी छात्र-छात्रा के लिए अहम होता है। झारखंड एकेडमिक काउंसिल परीक्षा के संचालन के पक्ष में है। सोशल डिस्टेंसिंग के आधार पर परीक्षा केंद्र का भी चयन किया गया है। कोरोना की रफ्तार से निकट भविष्य में परीक्षा के संचालन की संभावना कम है। परीक्षा के आयोजन से उनमें कोरोना संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ सकती है। ऐसे में राज्य सरकार मैट्रिक की परीक्षा नहीं लेने पर मुहर लगा सकती है। सीबीएसई-आईसीएसई बोर्ड ने पहले ही दसवीं की परीक्षा नहीं लेने का ऐलान किया था। दोनों बोर्ड नौवीं और दसवीं के असेसमेंट के आधार पर रिजल्ट तैयार कर रहे हैं। जून-जुलाई में इसके परिणाम भी जारी हो सकेंगे। ऐसे में जैक बोर्ड के मैट्रिक के परीक्षार्थियों पर निर्णय नहीं लिया गया तो वे उनसे पिछड़ सकते हैं। हालांकि केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के साथ बैठक में झारखंड की ओर से मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा लिए जाने को प्राथमिकता बताई गई है।

परीक्षा हुई तो रिजल्ट में होगी देरी

मैट्रिक की परीक्षा लेने का सरकार अगर निर्णय लेती है तो इसके आयोजन और रिजल्ट जारी करने में देरी होगी। वर्तमान हालात देखते हुए जून में परीक्षा का संचालन होने की संभावना कम नजर आ रही है। कोरोना संक्रमण कम होने पर जुलाई-अगस्त में परीक्षा का आयोजन होता भी है तो उसके मूल्यांकन और रिजल्ट जारी करने में अक्तूबर-नवंबर तक का समय लग सकता है। ऐसे में दूसरे बोर्ड का रिजल्ट पहले आ चुका होगा और इंटरमीडिएट व प्लस टू में नामांकन भी शुरू हो जाएगा। इस स्थिति में झारखंड बोर्ड के बच्चों को नुकसान होगा।

नौवीं का हो सकेगा आधार

मैट्रिक की परीक्षा देने वाले छात्र-छात्राओं का दसवीं क्लास में एसेसमेंट नहीं हो सका है। कोरोना महामारी की वजह से पिछले 14 महीनों से स्कूल का संचालन नहीं के बराबर हुआ। ऐसे में मैट्रिक की परीक्षा रद्द होती है तो नौवीं क्लास के रिजल्ट के आधार पर छात्र-छात्रा पास किए जा सकते हैं। 2020 में नौंवी का रिजल्ट 97 फीसदी था। इससे मैट्रिक में शामिल होने वाले करीब 4.30 लाख परीक्षार्थी पास कर सकते हैं।

इंटरमीडिएट की हो सकेगी परीक्षा

मैट्रिक की परीक्षा रद्द होने की स्थिति में सरकार इंटरमीडिएट की परीक्षा पर फोकस कर सकती है। इसका आयोजन कोरोना के मामले कम होने पर अगस्त तक किया जा सकता है। इसके पैटर्न में भी कुछ बदलाव करने पर सहमति बन सकती है, ताकि छात्र-छात्राओं को दिक्कत ना हो। इंटरमीडिएट की परीक्षा नहीं लेने से मार्क्स के आधार पर विश्वविद्यालयों में ग्रेजुएशन में नामांकन में समस्या आ सकती है।

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