बीआईटी मेसरा में पर्यावरणीय स्थिरता व उन्नत सामग्रियों में अनुप्रयोग पर मंथन
रांची में बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी), मेसरा में पर्यावरणीय स्थिरता और उन्नत सामग्रियों पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हुई। उद्घाटन सत्र में डॉ अशोक शेरोन ने जटिल प्रणालियों के अध्ययन की महत्वता बताई। वियना यूनिवर्सिटी की प्रो इल्ले सी गेबहेशूबर ने जैव-आधारित सामग्रियों पर व्याख्यान दिया, जिसमें प्रतिभागियों को नई सोच के लिए प्रेरित किया गया।

रांची, विशेष संवाददाता। बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी), मेसरा में पर्यावरणीय स्थिरता और उन्नत सामग्रियों के क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से- जटिल प्रणालियों की समझ: पर्यावरणीय स्थिरता और उन्नत सामग्रियों में अनुप्रयोग, विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला की शुरुआत बुधवार को हुई। कार्यशाला का समन्वयन डॉ निशी श्रीवास्तव ने किया, जबकि सह-समन्वयक के रूप में डॉ नीलिमा शर्मा हैं। उद्घाटन सत्र में बीआईटी, मेसरा के संकाय मामलों के डीन डॉ अशोक शेरोन ने कहा कि जटिल प्रणालियों का अध्ययन वर्तमान समय की वैज्ञानिक चुनौतियों के समाधान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।कार्यशाला का मुख्य आकर्षण वियना यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, ऑस्ट्रिया की वैज्ञानिक प्रो इल्ले सी गेबहेशूबर का व्याख्यान रहा।
उन्होंने प्रकृति से सीख: जैव-आधारित और जैव-अपघटनीय सामग्रियों में कार्यात्मक संरचनाएं, विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार प्रकृति से प्रेरित संरचनाओं के आधार पर टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों का विकास किया जा सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों को नई दिशा में सोचने के लिए प्रेरित किया।कार्यशाला में देश-विदेश के विशेषज्ञ, शोधार्थी और विद्यार्थी हिस्सा ले रहे हैं। प्रतिभागियों के बीच पर्यावरणीय स्थिरता और उन्नत सामग्रियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
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