महिलाओं की सामाजिक व संस्थागत चुनौतियों पर चर्चा
रांची में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 'त्वरित कार्रवाई: सतत चुनौतियों के बीच महिलाओं के अधिकारों को वास्तविक जीवन में रूपांतरित करना' विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। वक्ताओं ने महिलाओं की स्थिति, कानूनी संरक्षण और चुनौतियों पर विचार साझा किए। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने महिलाओं के सशक्तीकरण की आवश्यकता बताई।

रांची, विशेष संवाददाता। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रविवार को इनिशिएटिव फॉर लीगल अवेयरनेस एंड असिस्टेंस ट्रस्ट की ओर से रांची प्रेस क्लब में ‘त्वरित कार्रवाई: सतत चुनौतियों के बीच महिलाओं के अधिकारों को वास्तविक जीवन में रूपांतरित करना’ विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें महिलाओं की वर्तमान स्थिति, उनके लिए उपलब्ध कानूनी संरक्षण और उनके सामने उपस्थित सामाजिक और संस्थागत चुनौतियों पर विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने महिलाओं के सशक्तीकरण और उनके आजीविका के अवसरों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई। वक्ताओं में वकील दिव्यप्रकाश ने महिलाओं के अधिकारों को व्यवहारिक रूप से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रो स्वाति ने महिलाओं के अधिकारों की ऐतिहासिक यात्रा को रेखांकित किया। अमल आजाद ने झारखंड में प्रचलित अमानवीय कुप्रथा डायन-बिसाही के सामाजिक प्रभावों पर बात की। रजनी मुर्मू ने आदिवासी महिलाओं के अधिकार और सामाजिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।नीपा बसु ने कार्यस्थलों में पॉश अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और रांची वीमेंस कॉलेज की प्राचार्या डॉ विनीता सिंह ने शिक्षा के माध्यम से महिलाओं के सशक्तीकरण पर बल दिया। कार्यक्रम का संयोजन प्रो सचिन इंदीवर, हेमा गायकवाड़, निशाद खान, प्रिया साव व आर्यन ने किया।
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