व्यवसाय प्रबंधन के विद्यार्थियों को उद्यमिता अपनाने पर किया प्रेरित
रांची में केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड के व्यवसाय प्रशासन विभाग ने एक संवादात्मक सत्र का आयोजन किया। इसमें प्रो मलय कुमार मोहंती और प्रो रति नारायण कर ने छात्रों को उद्यमिता और प्रबंधन में नैतिकता के महत्व पर प्रेरित किया। सत्र ने छात्रों को ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रोत्साहित किया और शैक्षणिक सहयोग पर चर्चा की।

रांची, विशेष संवाददाता। केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड (सीयूजे) के व्यवसाय प्रशासन विभाग (डीबीए) की ओर से सोमवार को एक संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया। इसमें रेवेनशॉ विश्वविद्यालय, ओडिशा के प्रो मलय कुमार मोहंती और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो रति नारायण कर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम में विभाग के संकाय सदस्यों और एमबीए के विद्यार्थियों ने प्रबंधन शिक्षा, करियर विकास और नेतृत्व में मूल्यों के महत्व पर विचारों का आदान-प्रदान किया। प्रो मोहंती ने छात्र-छात्राओं को 2-3 वर्षों का पेशेवर अनुभव प्राप्त करने के बाद उद्यमिता की राह चुनने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शैक्षणिक शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी को पाटने में इंटर्नशिप की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि व्यावहारिक अनुभव से आत्मविश्वास बढ़ता है, जो भविष्य में उद्यम शुरू करने में सहायक होता है। छोटे उद्यमियों के सफल उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय का मूल मंत्र रोजगार नहीं, बल्कि नियोजन क्षमता है। प्रो कर ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति महानता हासिल करने में सक्षम है, बस स्वयं पर विश्वास रखने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रबंधन में नैतिकता के महत्व को रेखांकित करते हुए भावी नेतृत्वकर्ताओं को याद दिलाया कि स्थायी सफलता के लिए ईमानदारी और जिम्मेदारी अनिवार्य है। सत्र के दौरान संकाय सदस्यों ने अतिथि प्रोफेसरों के साथ शोध सहयोग, पाठ्यक्रम नवाचार और शैक्षणिक साझेदारी के अवसरों पर चर्चा की। वहीं, छात्र-छात्राओं ने करियर की तैयारी और नेतृत्व की चुनौतियों से संबंधित प्रश्न पूछे। प्रो भगवान सिंह ने इस सत्र के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के संवाद छात्रों को ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित करते हैं और संस्थानों के बीच शैक्षणिक नेटवर्क को मजबूत करते हैं। प्रो भगवान सिंह ने दिया साथ ही कार्यक्रम का समापन प्रबंधन शिक्षा में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और विभिन्न संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के संकल्प के साथ हुआ। इस दौरान डीन अकादमिक प्रो मनोज कुमार, डॉ प्रज्ञान पुष्पांजलि, डॉ नागपवन चिंतलापति, डॉ रचना जायसवाल और स्निग्धा सहित शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित थे।
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