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रांचीमहाराष्ट्र में लॉक डाउन का असर, पुणे स्पेशल ट्रेन से हजारों लोग झारखंड पहुंचे

हिन्दुस्तान टीम,रांचीPublished By: Newswrap
Fri, 09 Apr 2021 03:03 AM
महाराष्ट्र में लॉक डाउन का असर, पुणे स्पेशल ट्रेन से हजारों लोग झारखंड  पहुंचे

रांची। संवाददाता

एक बार फिर से कोरोना संक्रमण बढ़ने और महाराष्ट्र में लगा लॉक डाउन का असर दिखने लगा है। झारखंड से जो लोग रोजगार की तलाश में महाराष्ट्र जैसे राज्यों में गए थे। वे वापस आना शुरू कर दिया है। ऐसी ही स्थिति गुरुवार हटिया स्टेशन पर देखी।द पुणे-हटिया स्पेशल ट्रेन से हजारों लोग हटिया स्टेशन पहुंचे। इसमें 99 फीसद लोग पुणे के होटलों में काम करने वाले मजदूर थे। लॉक डाउन होने की वजह से होटल बंद हो गया। जिसके कारण उन्हें मजबूरन लौटना पड़ा। इसमें कुछ छात्र भी थे। जो पढ़ने गए थे। लॉक डाउन के कारण उन्हें समस्या हो रही थी। इस वजह से भी वे लौटे। पूरी ट्रेन वापस लौटने वाले यात्रियों से खचाखच भरी हुई थी। भीड़ इतनी थी कि स्टेशन के फुट ओवर ब्रिज और प्लेटफार्म और स्टेशन के बाहर लोगों का रेला लग गया था। पुणे स्पेशल ट्रेन के सभी बोगियों में यात्री फुल थे। सभी यात्री महाराष्ट्र-पुणे से आए थे। वापस लौटने वाले में अधिकतर लोग झारखंड के मधुपुर, जामताड़ा, साहेबगंज, दुमका सहित अन्य जगहों से थे। जो काम की तलाश में पुणे गए थे।

हटिया स्टेशन में नही हुई कोविड की जांच, काउंटर रहा खाली (फोटो है)

कोविड को लेकर जागरूकता फैलाने का काम भी नही हुआ

रांची।

जिला प्रशासन और रेलवे के साथ पिछले दिनों बैठक में राज्य से बाहर से जाने वाली ट्रेनों में कोविड को लेकर सतर्कता बरतने की सहमति बनी थी। इसमें एर्नाकुलम एक्सप्रेस, एलेप्पी, पूणे, एलटीटी सहित अन्य ट्रेनें जो दूसरे प्रभावित राज्य से रांची-झारखंड आ रहे है। उनके यात्रियों की कोविड जांच और जनजागरूकता चलाने की सहमति बनी थी। हटिया स्टेशन में विशेष रूप से कोविड जांच को लेकर काउंटर बनाए भी गए है। परंतु जब पुणे-हटिया स्पेशल ट्रेन आई तो काउंटर खाली था। इस दौरान न ही बाहर से आने वाले लोगों की कोविड जांच कराने को लेकर जागरूकता तक नही फैलाया गया। जैसे ही भीड़ स्टेशन से बाहर निकली। वैसे ही पूरी भीड़ ऑटो व अन्य वाहन पकड़ कर अपने गतंव्य स्थान जाने के लिए निकल गए। जबकि रांची से बाहर जाने वाले यात्रियों को स्टेशन में कतारबद्ध होकर प्रवेश कराया जा रहा था। साथ ही उनकी थर्मल स्क्रेनिंग तक की जा रही थी। परंतु आने वाले यात्रियों के लिए न ही कोई व्यवस्था दिखी और न रेलवे और जिला प्रशासन की ओर से सक्रियता।

होटल में काम करते थे, परंतु ठीक से नही मिल रहा था खाना

रांची। संवाददाता

झारखंड में रोजागार नही मिला। सोचे की बाहर जाकर कुछ कमा खा लेंगे और परिवार पाल लेंगे। परंतु इस लॉक डाउन जीने खाने का आधार ही छिन लिया। यह कहानी है मधुपुर के ताहिर और शाजिद की है। उसके जैसे हजारों युवा ऐसे थे। पहली बार लगे जनता कफ्यू-लॉक डाउन के बाद दोबारा काम की तलाश में झारखंड छोड़ दूसरे राज्यों में गए थे। पुणे में होटल व्यवसाय काफी चलता है। जिसकी वजह से हमलोगों को वहां हम लोगों को दोबारा काम मिल गया था। परंतु दूसरी बार लॉक डाउन लगने से पहले की भांति ही फिर से भूखमरी व बेरोजगारी की स्थिति पैदा हो गई। हमलोगों के गांव से 10 से 12 लोग होटल में काम करने गए थे। जब लॉक डाउन नही था। तब सामान्य चल रहा था। परंतु जैसी ही सबकुछ बंद हुआ। हालत खराब होना शुरू हो गई। कहने को हमलोग होटल में काम करते थे। कोई कूक का तो कोई वेटर, तो कोई सफाई कर्मी तो कोई हाउस किपिंग का। परंतु स्थिति ऐसी हो गई थी। खाने के लाले पड़ गए थे। होटल मालिक ने खाना देने से मना कर दिया। सामान्य दिनों में हमलोग 20 से 25 हजार रुपये महीना कमा लेते थे। पैसे खत्म न हो। इसलिए वापस आना मजबूरी हो गया। कई ऐसे झारखंड के युवा थे। जिन्हें होटल मालिक ने पूरे माह का वेतन तक नही दिया। जबकि कईयों को आने का भाड़ा भी नही दिया। किसी तरह वे झारखंड को लौटे। उन्होंने बताया कि वहां और समय रहते तो भूखे मर जाते। इसलिए अपने गांव-घर जा रहे है। किसी तरह वहां काम चला लेंगे।

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