असफलताओं से सीखें और अपना रास्ता खुद बनाएं: प्रो. एलिजाबेथ

हिन्दुस्तान, रांची
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रांची में आईआईएम के तीसरे डॉक्टोरल रिसर्च कॉन्फ्रेंस का समापन हुआ, जिसमें पीएचडी शोधार्थियों ने अपने शोध प्रस्तुत किए। प्रो. एलिजाबेथ रोज ने निरंतर सीखने और नैतिक मूल्यों पर बल दिया। आईआईएम रांची के निदेशक ने प्रभावशाली शोध की आवश्यकता बताई। 139 शोध पत्र विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए और प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र दिए गए।

असफलताओं से सीखें और अपना रास्ता खुद बनाएं: प्रो. एलिजाबेथ

रांची, विशेष संवाददाता। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), रांची में आयोजित दो दिवसीय तीसरे डॉक्टोरल रिसर्च कॉन्फ्रेंस (डीआरसी)-2026 का समापन शुक्रवार को शोध, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता के संदेश के साथ हुआ। सम्मेलन में विभिन्न संस्थानों के पीएचडी शोधार्थियों ने अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। कार्यक्रम ने शोधार्थियों को अपने शोध पर रचनात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त करने और समकालीन विषयों पर अकादमिक विमर्श में भागीदारी का अवसर प्रदान किया। सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत आईसीएफएआई फाउंडेशन फॉर हायर एजुकेशन की प्रो-वाइस चांसलर व आईआईएम उदयपुर की पूर्व रिसर्च चेयर प्रोफेसर प्रो एलिजाबेथ रोज के वक्तव्य से हुई।

शोधार्थियों को मार्गदर्शन

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि अकादमिक करियर प्रत्येक व्यक्ति की अपनी यात्रा होती है, जो अक्सर सीधी रेखा में नहीं चलती। उन्होंने शोधार्थियों को लगातार स्वयं को बेहतर बनाने, असफलताओं से सीखने और अस्वीकृतियों के बावजूद लेखन जारी रखने की सलाह दी। प्रो रोज ने कहा कि शोधकर्ताओं को अपना मार्ग स्वयं बनाना चाहिए व लक्ष्य के प्रति समर्पित रहकर निरंतर सीखते रहना चाहिए। उन्होंने शोध में नैतिक मूल्यों, समय-प्रबंधन, दृढ़ता और सहयोगात्मक कार्य संस्कृति के महत्व पर भी जोर दिया। इसके अलावा उन्होंने शोध प्रक्रिया पर एक संवादात्मक सत्र का संचालन किया, जिसमें शोधार्थियों ने विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे और मार्गदर्शन प्राप्त किया।

शोध और शिक्षण का संतुलन

समापन सत्र में आईआईएम रांची के निदेशक प्रो. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने प्रबंधन शिक्षा में शोध और शिक्षण के संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शोध सिर्फ नए ज्ञान का सृजन ही नहीं करता, बल्कि शिक्षण को भी सुदृढ़ बनाता है और वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने शोधार्थियों से सामाजिक रूप से प्रासंगिक और प्रभावशाली शोध करने का आह्वान किया व कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने की सलाह दी।

वार्षिक रिपोर्ट और पुरस्कार

मौके पर रिसर्च एंड पब्लिकेशन एनुअल रिपोर्ट 2026 का भी विमोचन किया गया। रिपोर्ट की मुख्य बातें साझा करते हुए डॉक्टोरल प्रोग्राम एंड रिसर्च (डीपीआर) के अध्यक्ष प्रो मनीष बंसल ने बताया कि वर्ष के दौरान आईआईएम रांची के शिक्षकों ने वित्त एवं लेखांकन, विपणन, सूचना प्रणाली व बिजनेस एनालिटिक्स, संचालन प्रबंधन, ओबीएचआर, अर्थशास्त्र एवं लोक नीति, रणनीति और लिबरल आर्ट्स एंड साइंसेज सहित विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित पीयर-रिव्यूड पत्रिकाओं में 139 शोध पत्र प्रकाशित किए। उन्होंने बताया कि इन प्रकाशनों में से 42 प्रतिशत शोध पत्र एबीडीसी की ए प्लस, ए और अन्य उच्च श्रेणी की पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। संस्थान का शोध कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल परिवर्तन, सतत विकास, जलवायु परिवर्तन, वित्तीय बाजार, लोक नीति, स्वास्थ्य सेवा, उपभोक्ता व्यवहार और भविष्य के कार्यस्थल जैसे समकालीन विषयों पर केंद्रित रहा। उन्होंने यह भी बताया कि आईआईएम रांची का शोध संयुक्त राष्ट्र के 21 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) से संबंधित विषयों में योगदान दे रहा है। बताया कि संस्थान ने 15 केस स्टडी विकसित कीं, जिनमें से कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंचों- आईवी पब्लिशिंग, हार्वर्ड बिजनेस स्कूल पब्लिशिंग और एमराल्ड इमर्जिंग मार्केट्स केस स्टडीज में प्रकाशित हुईं। इसके अतिरिक्त संकाय सदस्यों ने पुस्तकों, पुस्तक अध्यायों और पुस्तक समीक्षाओं के रूप में लगभग 20 कृतियों का योगदान दिया। संस्थान ने शोध सहयोग को बढ़ावा देने के लिए 25 थर्सडे सेमिनार सीरीज, 20 गेस्ट सेमिनार सीरीज व कई शोध पद्धति कार्यशालाओं का आयोजन भी किया।

समापन समारोह का महत्व

समापन समारोह के दौरान सभी 10 प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। वहीं, सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार आईआईएम कलकत्ता के पीएचडी शोधार्थी शुभम कुमार ओझा को उनके शोधपत्र- शहरीकरण से होने वाले नकारात्मक बाहरी प्रभावों को अपनाना: भारत के रर्बन मिशन से मिले सबूत, के लिए प्रदान किया गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉक्टोरल रिसर्च कॉन्फ्रेंस कब आयोजित किया गया?
डॉक्टोरल रिसर्च कॉन्फ्रेंस 2026 का आयोजन शुक्रवार को हुआ।
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