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उग्रवादियों के गढ़ में जमकर बरसे वोट, बहिष्कार का असर नहीं

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झारखंड में दूसरे चरण की सीटों पर चुनाव के दौरान उग्रवाद प्रभाव वाले इलाकों में जमकर मतदान हुआ। भाकपा माओवादियों के वोट बहिष्कार को धत्ता बताते हुए ग्रामीण वोट डालने पहुंचे। उग्रवाद प्रभावित इलाकों में मतदान की गतिविधियों की पूरी मॉनिटरिंग पुलिस मुख्यालय द्वारा की जा रही थी। रांची और खूंटी लोकसभा के तहत उग्रवाद प्रभावित आठ विधानसभा क्षेत्रों में वोटिंग में ग्रामीण मतदाताओं में खासा उत्साह रहा। चुनाव के दौरान हजारीबाग के बड़कागांव के कुछ इलाकों में वोट बहिष्कार की सूचना पुलिस मुख्यालय को मिली थी, वहीं राज्य के बाकि हिस्सों में चुनाव शांतिपूर्ण रहा। देर शाम तक उग्रवाद प्रभाव वाले इलाकों में ईवीएम को सुरक्षित पहुंचाने के पुलिस बल लगे थे।

कैसे पड़ी वोट की चोट
झारखंड के खूंटी लोकसभा के खरसांवा, तमाड़, तोरपा, खूंटी, सिमडेगा और कोलेबिरा नक्सल प्रभाव वाले इलाके हैं, वहीं रांची के ईचागढ़ और खिजरी में उग्रवाद प्रभाव है। पत्थलगड़ी व उग्रवाद प्रभाव वाले खरसांवा में सर्वाधिक 70.23 फीसदी मतदान हुआ। जबकि माओवादियों के गढ़ तमाड़ में 64.76 फीसदी मतदान हुआ। पीएलएफआई प्रभाव वाले खूंटी इलाके में 63.50, सिमडेगा में 62.50, कोलेबिरा मे 63.10 फीसदी मतदान हुआ। रांची लोकसभा के तहत आने वाले सरायकेला जिले के ईचागढ़ में 69.58 फीसदी मतदान हुआ, जबकि पीएलएफआई और भाकपा माओवादी के आंशिक प्रभाव वाले खिजरी इलाके में 66.09 फीसदी मतदान हुआ।

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पुलिस दिनभर चलाती रही अभियान, सुरक्षित माहौल में वोट की चोट
राज्य पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर डीआईजी चाईबासा कुलदीप द्विवेदी और रांची डीआईजी अमोल वी होमकर की तैनाती सुबह से ही उग्रवाद प्रभावित इलाकों में कर दी गई थी। डीआईजी चाईबासा के साथ सीआरपीएफ डीआईजी एचएस रावत, 196 बटालियन के कमांडेंट हरपाल सिंह की तैनाती की गई थी। खूंटी लोकसभा के तहत आने वाले पत्थलगड़ी व उग्रवाद प्रभावित इलाकों में पुलिस व सीआरपीएफ की टीम ने सुबह से ही रोड ओपन पेट्रोलिंग अभियान चलाया। पुलिस बलों को पैदल इलाके में घूमकर लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करवाया गया। घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस बलों ने टूटी सड़कों पर गश्ती से परहेज किया। बम डिस्पोजल टीम द्वारा भी नक्सल प्रभाव वाले इलाकों में दिनभर अभियान चला। तमाड़ के नक्सल प्रभाव वाले इलाके में डीआईजी रांची व सीआरपीएफ की 133 बटालियन द्वारा अभियान चलाया गया। घोर संवेदनशील दलबंगा, कुचाई, बारूहातू, तमाड़ के मरधान, बासुकोचा इलाके में पुलिस का सर्वाधिक मूवमेंट रहा। 

हर जगह ड्रोन से मॉनिटरिंग
नक्सल प्रभाव वाले इलाके में उग्रवादी संगठनों की गतिविधि पर नजर रखने के लिए सुरक्षाबलों ने ड्रोन का भी इस्तेमाल किया। नक्सल प्रभाव वाले इलाके में ड्रोन से वीडियोग्राफी भी करायी जा रही थी।

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  • Web Title:huge voting in naxal affected areas in jharkhand no seen of boycott