मुरहू में पारंपरिक रीति से कल होगा होलिका दहन

Feb 28, 2026 09:07 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रांची
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मुरहू में होली के पर्व पर होलिका दहन की विशेष धार्मिक मान्यता है। इस वर्ष 2 मार्च को यह पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाएगा। मारवाड़ी समाज के लोग, विशेषकर श्याम सुंदर माहेश्वरी के परिवार, गोबर से गोइठों का निर्माण कर पूजा करते हैं। यह परंपरा सामाजिक समरसता का प्रतीक है।

मुरहू में पारंपरिक रीति से कल होगा होलिका दहन

मुरहू, प्रतिनिधि। होली के पावन पर्व पर होलिका दहन की विशेष धार्मिक मान्यता है। इस वर्ष 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा। मुरहू में मारवाड़ी समाज द्वारा यह पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ बड़े श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाता है। विशेषकर श्याम सुंदर माहेश्वरी के परिवार सहित अन्य मारवाड़ी समाज के लोग वर्षों से इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं। होलिका दहन की तैयारियां कई दिन पहले से शुरू हो जाती हैं। सरला साबू द्वारा गोबर से बने गोइठों को पारंपरिक ढंग से सजाया जाता है और नियमित रूप से उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। गोबर से बने गोइठों के माध्यम से होलिका और भक्त प्रह्लाद की प्रतिमा तैयार की जाती है।

इसके साथ ही एक विशेष ढाल भी बनाई जाती है, जिसे होलिका दहन के दिन अग्नि के बीच रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी गोबर से निर्मित ढाल को मारवाड़ी समाज अपने प्रमुख पर्व गणगौर में भी श्रद्धापूर्वक पूजता है। समाज में गोइठों की यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसे विशेष आस्था के साथ निभाया जाता है। मुरहू में अब यह परंपरा अन्य समाजों द्वारा भी अपनाई जा रही है, जो सामाजिक समरसता का परिचायक है। होलिका दहन की रात्रि में लोग एकत्रित होकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। मारवाड़ी पारंपरिक गीतों की गूंज और भक्त प्रह्लाद की कथा के स्मरण के साथ होलिका का दहन किया जाता है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का भी सुंदर संदेश देता है।

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