
निर्धारित आठ करोड़ के फंड में कितने का किया गया इस्तेमाल
हजारीबाग से बरही तक एनएच-33 के चौड़ीकरण के दौरान पौधरोपण में स्थानीय लोगों को शामिल करने के लिए हाईकोर्ट ने एनएचएआई से जानकारी मांगी है। कोर्ट ने पौधरोपण के लिए 8 करोड़ रुपये के उपयोग की जानकारी मांगी है, जिसमें कितने पौधे लगाए गए और कितने जीवित हैं, इसका विवरण मांगा गया है। अगली सुनवाई 5 जनवरी को होगी।
रांची, विशेष संवाददाता। हजारीबाग से बरही तक एनएच-33 के चौड़ीकरण के दौरान पौधरोपण में स्थानीय लोगों को शामिल करने पर हाईकोर्ट ने एनएचएआई के झारखंड के अधिकारियों से विस्तार से जानकारी मांगी है। बुधवार को चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने पौधरोपण के लिए मंजूर आठ करोड़ रुपये के इस्तेमाल के बाद जमीनी रिपोर्ट भी पेश करने का निर्देश दिया है। इस राशि में कितनी राशि खर्च हुई। कितने पौधे लगाए गए और कितने पौधे जीवित हैं, इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई पांच जनवरी को होगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट के आदेश के आलोक में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुनवाई के दौरान उपस्थित हुए।

कोर्ट ने एनएचएआई से यह जानकारी मांगी कि सड़क के दोनों ओर पौधरोपण के लिए कितनी राशि खर्च की गई और कुल कितने फंड का उपयोग हुआ। इस पर प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने अदालत को बताया कि हजारीबाग से बरही के बीच एनएच-33 के दोनों ओर पौधारोपण के लिए लगभग 8 करोड़ रुपये का फंड निर्धारित था, जिसका उपयोग किया गया। कोर्ट ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बावजूद कितने पेड़ वास्तव में जीवित हैं। इस पर एनएचएआई की ओर से बताया गया कि करीब 2300 पौधे जीवित हैं।

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