
स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर सरकार को जवाब देने का अंतिम मौका
संक्षेप: झारखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और मूलभूत सुविधाओं के अभाव पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने सरकार को अंतिम अवसर देते हुए दो सप्ताह में शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया। यदि समय पर शपथपत्र नहीं दिया गया, तो शिक्षा विभाग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होना होगा। अगली सुनवाई 13 नवंबर को होगी।
रांची, विशेष संवाददाता। राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और मूलभूत सुविधाएं दूर करने पर सरकार की ओर से जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने सोमवार को नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने कहा कि इस मामले में सरकार को पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका था, ऐसे में शपथपत्र क्यों नहीं दाखिल किया गया। कोर्ट ने सरकार को अंतिम अवसर देते हुए दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि यदि इस अवधि तक शपथपत्र दाखिल नहीं किया जाता है, तो शिक्षा विभाग के सचिव को अदालत में व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर स्पष्टीकरण देना होगा।

मामले की अगली सुनवाई 13 नवंबर को निर्धारित की गई है। मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी से संबंधित मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कई विद्यालय ऐसे हैं, जहां पूरे स्कूल का संचालन मात्र एक शिक्षक के भरोसे हो रहा है। कई विद्यालयों में बच्चों के बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं है और पेयजल सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। यू-डायस के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि राज्य के 30 प्रतिशत से अधिक प्राथमिक विद्यालयों में केवल एक शिक्षक कार्यरत हैं, जो शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का स्पष्ट उल्लंघन है।

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