खनन कानूनों के दुरुपयोग पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा समाधान
रांची हाईकोर्ट ने खनन कानूनों के दुरुपयोग से संबंधित अशोक सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने सरकार को एक महीने में समाधान प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और मुख्य सचिव को मामले पर नजर रखने को कहा। अगली सुनवाई 17 जून को होगी।

रांची, विशेष संवाददाता। खनन कानूनों के तहत प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग से संबंधित अशोक सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने सरकार को मामले का समाधान प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए एक माह का समय दिया। कोर्ट ने मुख्य सचिव को भी पूरे मामले पर नजर रखने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होगी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त समय मांगे जाने पर अदालत ने मौखिक कहा कि सरकार को समाधान के साथ कोर्ट में उपस्थित होना चाहिए था।
आमलोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान होना चाहिए, लेकिन सरकार ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी करती है। सुनवाई के दौरान लातेहार के तत्कालीन उपायुक्त भोर सिंह यादव वर्चुअल माध्यम से कोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में रहने के कारण वह व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि उनके कारण उत्पन्न हुई समस्या का अब तक समाधान क्यों नहीं निकाला गया। कोर्ट ने यह भी पूछा कि अवैध खनन परिवहन मामले में जब्त किए गए वाहन की इतनी जल्दबाजी में नीलामी क्यों कर दी गई, जबकि उससे संबंधित रिवीजन याचिका लंबित थी। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को पर्याप्त अवसर दिए बिना वाहन की नीलामी कर उसे तीसरे पक्ष को हस्तांतरित करना गंभीर मामला है। मामले में वर्तमान उपायुक्त संदीप कुमार भी कोर्ट में सशरीर उपस्थित हुए। अदालत ने सरकार के रवैये पर असंतोष जताते हुए कहा कि मामले को टालने के बजाय उसका व्यावहारिक समाधान सामने लाया जाना चाहिए था।
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