शहादत दिवस पर भी उपेक्षित भगवान बिरसा मुंडा की खंडित प्रतिमा
सिल्ली में भगवान बिरसा मुंडा का शहादत दिवस मनाया जा रहा है, लेकिन उनकी क्षतिग्रस्त प्रतिमा की उपेक्षा ने लोगों की भावनाओं को आहत किया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रतिमा की जल्द मरम्मत की जाए, क्योंकि यह आदिवासी समाज की अस्मिता से जुड़ा है।

सिल्ली, प्रतिनिधि। नौ जून को धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा का शहादत दिवस (बलिदान दिवस) मनाया जा रहा है। ऐसे पावन अवसर पर भी उनकी खंडित प्रतिमा का उपेक्षित अवस्था में होना लोगों की भावनाओं को आहत कर रहा है। यह स्थिति महापुरुषों के प्रति संवेदनहीनता और प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है। सिल्ली से पिस्का गांव जाने वाली मुख्य सड़क पर खपचाबेड़ा के निकट स्थित बिरसा चौक में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पिछले करीब एक वर्ष से क्षतिग्रस्त अवस्था में पड़ी है। प्रतिमा के हाथ टूटे हुए हैं और उसका स्वरूप जीर्ण-शीर्ण हो चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहादत दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर भी प्रतिमा की मरम्मत नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है。
जुलाई 2025 में असामाजिक तत्वों ने पहुंचाया था नुकसान:
ग्रामीणों के अनुसार 9 जुलाई 2025 को कुछ असामाजिक तत्वों ने प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया था। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले में कार्रवाई भी की थी और कुछ दिनों तक क्षेत्र में काफी चर्चा रही। हालांकि समय बीतने के साथ मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
मरम्मत की मांग तेज:
स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना को एक वर्ष बीत जाने के बावजूद प्रतिमा की मरम्मत नहीं कराई गई है। शहादत दिवस के अवसर पर लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अविलंब प्रतिमा की मरम्मत कराने तथा चौक का सौंदर्यीकरण करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि धरती आबा के सम्मान से जुड़ा यह विषय केवल एक प्रतिमा का नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की अस्मिता और गौरव से भी जुड़ा हुआ है।


