श्रद्धा के केंद्र उलिहातू में 126वीं शहादत दिवस की तैयारियां पूरी
खूंटी, संवाददाता। भगवान बिरसा मुंडा की 126वीं शहादत दिवस मंगलवार को श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाएगी। उलिहातू में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि विकास की योजनाएं अधूरी हैं और आवास निर्माण में देरी हो रही है। बिरसा टूरिस्ट सर्किट योजना की शुरुआत का इंतजार है।

खूंटी, संवाददाता। आदिवासी समाज के महानायक, स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत और जननायक भगवान बिरसा मुंडा की 126वीं शहादत दिवस मंगलवार को खूंटी समेत पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर उनकी जन्मस्थली और कर्मभूमि उलिहातू में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, आदिवासी समुदाय, प्रशासनिक अधिकारी और श्रद्धालु शामिल होंगे। शहादत दिवस को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। सोमवार को जिला कल्याण पदाधिकारी प्रमोद राम और जिला खेल सह पर्यटन पदाधिकारी राजेश कुमार चौधरी ने उलिहातू पहुंचकर कार्यक्रम स्थल एवं अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मंगलवार को उपायुक्त मो. जावेद हुसैन, पुलिस अधीक्षक ऋषभ गर्ग, उप विकास आयुक्त प्रवीण कुमार प्रकाश सहित कई वरीय अधिकारी भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे。
शहादत दिवस की शुरुआत
भगवान बिरसा मुंडा के वंशज सुखराम मुंडा ने बताया कि शहादत दिवस की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होगी। सुबह गांव के पाहन द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी, जिसके बाद श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होंगे। उलिहातू के अलावा डोम्बारीबुरु, कचहरी मैदान, बिरसा कॉलेज परिसर, सेनिटेशन पार्क में भी स्थापित भगवान बिरसा मुंडा के प्रतिमा में विभिन्न राजनैतिक दलों, धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के लोग सहित बड़ी संख्या में बिरसईत भगवान बिरसा मुंडा के शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि देंगे।
उलिहातू में विकास की स्थिति
भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातू देशभर के आदिवासी समाज के लिए आस्था, संघर्ष और गौरव का प्रतीक है। पिछले वर्षों में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित कई बड़े नेताओं ने यहां पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की और विकास के अनेक वादे किए। इसके बावजूद गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि उलिहातू के समग्र विकास के लिए कई योजनाएं बनीं, लेकिन उनका लाभ अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया। सबसे बड़ी चिंता शहीद ग्राम विकास योजना के तहत बनने वाले आवासों को लेकर है। वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2022-23 के बीच 136 लाभुकों के लिए लगभग 3.57 करोड़ रुपये की लागत से आवास निर्माण की योजना स्वीकृत हुई थी, लेकिन अब तक केवल 18 आवास ही पूर्ण हो सके हैं। शेष 112 आवास निर्माणाधीन हैं।
आवास निर्माण की समस्याएं
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों बाद भी योजना अधूरी है और आज भी कई परिवार जर्जर खपड़ैल मकानों में रहने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि जब भी कोई वीवीआईपी दौरा होता है, तब गांव की वास्तविक स्थिति को छिपाने के लिए घरों को पर्दों से ढंक दिया जाता है।
वंशजों को भी नहीं मिला पक्का आवास:
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि भगवान बिरसा मुंडा के वंशजों के लिए अब तक स्थायी आवास का निर्माण नहीं हो पाया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने उलिहातू दौरे के दौरान वंशजों के लिए मकान निर्माण में सहयोग की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक उस दिशा में कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दी है। बिरसा मुंडा के वंशज आज भी एस्बेस्टस की छत वाले मकान में रहने को विवश हैं।
विकास पर खर्च और योजनाएं
जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार उलिहातू में अब तक विभिन्न योजनाओं के तहत लगभग 5.26 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इनमें आवास निर्माण, बिरसा पुस्तकालय का जीर्णोद्धार, आवासीय विद्यालय और छात्रावास की मरम्मत, पेयजल सुविधा, स्ट्रीट लाइट और सड़क निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं। इसके बावजूद गांव में समग्र विकास की तस्वीर अभी भी अधूरी नजर आती है। उलिहातू स्थित भगवान बिरसा मुंडा के पैतृक निवास स्थल ‘बिरसा ओड़ा’ का 2.35 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। इस परियोजना का शिलान्यास 15 नवंबर 2025 को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर राज्यपाल संतोष गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और केंद्रीय मंत्री जोयल उरांव की उपस्थिति में किया गया था। योजना के तहत बिरसा मुंडा के पैतृक आवास को आदिवासी परंपरा और संस्कृति के अनुरूप विकसित किया जाना है। हालांकि ग्रामीणों के अनुसार कार्य की गति काफी धीमी है और अब तक लगभग 20 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है।
पर्यटन सर्किट योजना का इंतजार
केंद्र सरकार ने भगवान बिरसा मुंडा से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को एक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने के लिए लगभग 40 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना स्वीकृत की है। इसके तहत उलिहातू, डोंबारीबुरु, चलकद, बिरबांकी, एटकेडीह और खूंटी थाना हाजत जैसे ऐतिहासिक स्थलों का विकास किया जाना है। योजना में खूंटी थाना हाजत के जीर्णोद्धार, डोंबारीबुरु और उलिहातू के विकास, गेस्ट हाउस सह ऑडिटोरियम, रेस्ट हाउस तथा अन्य पर्यटन सुविधाओं का निर्माण शामिल है। राशि उपलब्ध होने और डीपीआर स्वीकृत होने के बावजूद अब तक जमीनी स्तर पर कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है।
जिला कल्याण पदाधिकारी प्रमोद राम ने बताया कि बिरसा टूरिस्ट सर्किट योजना के लिए फंड उपलब्ध है तथा डीपीआर को भी स्वीकृति मिल चुकी है। जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि योजना पूरी होने के बाद भगवान बिरसा मुंडा से जुड़े सभी महत्वपूर्ण स्थलों को एक पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुविधा मिलेगी तथा क्षेत्र के विकास को भी गति मिलेगी।
खूंटी में करोड़ों रुपये खर्च
खूंटी। धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातू के विकास के लिए अब तक विभिन्न योजनाओं के तहत करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। शहीद ग्राम विकास योजना के अंतर्गत 136 आवासों के निर्माण पर ₹3.57 करोड़ व्यय किए गए हैं। वहीं बिरसा पुस्तकालय के जीर्णोद्धार पर ₹24.97 लाख, आवासीय विद्यालय की मरम्मत पर ₹86.74 लाख तथा छात्रावास की मरम्मत पर ₹75.40 लाख खर्च हुए हैं। पेयजल सुविधा सुदृढ़ करने के लिए डीप बोरिंग पर ₹13.10 लाख की राशि खर्च की गई। इसके अलावा बिरसा कॉम्प्लेक्स के सौंदर्यीकरण पर ₹3.98 लाख और गांव में 100 स्ट्रीट लाइट लगाने पर ₹17 लाख व्यय किए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि इन योजनाओं से क्षेत्र के विकास को नई गति मिली है।


