कॉमर्शियल गैस नहीं मिलने से मेनू में कटौती, कोयला-लकड़ी का सहारा
खूंटी और तोरपा में रसोई गैस की किल्लत से होटल और रेस्टोरेंट प्रभावित हो रहे हैं। संचालक कोयला और लकड़ी का उपयोग करने को मजबूर हैं, जिससे व्यंजन बनाने में कठिनाई हो रही है। गैस की कमी के कारण खाने की कीमतें भी बढ़ गई हैं। होटल संचालक प्रशासन से गैस आपूर्ति में सुधार की मांग कर रहे हैं।

खूंटी/तोरपा, हिटी। जिले में रसोई गैस की किल्लत का असर अब होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों पर साफ दिखने लगा है। कॉमर्शियल गैस नहीं मिलने के कारण संचालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि कई होटल संचालक गैस के स्थान पर कोयला और लकड़ी का उपयोग करने को मजबूर हैं। गैस की कमी के कारण तेज आंच पर बनने वाले व्यंजन तैयार करना मुश्किल हो गया है। नतीजतन कई होटल और ढाबों ने अपने मेनू से ऐसे आइटम हटा दिए हैं। शादी-ब्याह का सीजन शुरू होने के बावजूद गैस उपलब्ध नहीं होने से संचालक बड़े ऑर्डर लेने से भी कतरा रहे हैं।कोयले
की भट्ठी से बढ़ी परेशानी:होटल संचालक दिनेश ने बताया कि कॉमर्शियल गैस नहीं मिलने से अब कोयले की भट्ठी पर काम करना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ काम में समय अधिक लगता है, बल्कि किचन में गंदगी भी बढ़ जाती है। कई ऐसे व्यंजन जो तेज आंच पर बनते थे, उन्हें बनाना बंद करना पड़ा है, जिससे बिक्री पर भी असर पड़ा है।महंगाई की मार, बढ़े खाने के दाम:गैस संकट का असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ रहा है। खूंटी, तोरपा, डोडमा और अंगराबारी के कई होटल संचालकों ने समोसा, कचौड़ी और जलेबी की कीमत आठ रुपये से बढ़ाकर दस रुपये प्रति पीस कर दी है। वहीं ठेला संचालकों ने धुसका, बर्रा और आलू चॉप की कीमत भी बढ़ा दी है।होटल संचालकों ने की समाधान की मांग:होटल संचालकों का कहना है कि गैस एजेंसियों से संपर्क करने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं मिल रहा है। उन्होंने प्रशासन से जल्द कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति सुचारू करने की मांग की है, ताकि व्यवसाय और आम जनजीवन सामान्य हो सके।
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