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इंजीनियरिंग के छात्रों ने बनायी फार्मूला वन रेसिंग कार

इंजीनियरिंग के छात्रों ने बनायी फार्मूला वन रेसिंग कार

बीआईटी मेसरा के 35 इंजीनियरिंग छात्रों ने 10 माह में फार्मूला वन रेसिंग कार टीएसआई-18 ईजाद की है। सभी मेकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और केमिकल इंजीनियरिंग के छात्र हैं। छात्र अगले माह कोयम्बटूर में होने वाले फार्मूला वन रेसिंग में कार के साथ भाग लेंगे। इस कार को बनाने के लिए छात्रों ने बाईक की इंजन का इस्तेमाल किया है। 390 सीसी की इस कार के मॉडल को छात्रों ने खुद तैयार किया है। इस पूरे प्रोजेक्ट को टीम सृजन का नाम दिया गया है। इस कार को बनाने में 16 लाख रुपए की लागत आयी है। जिसमें संस्थान ने एक चौथाई फंड दिया, शेष पूर्ववर्ती छात्रों व प्रायोजकों ने दिया।

टीम सृजन के कैप्टन मृगेंद्र नारायण सिंह बताते हैं कि कार को सेफ्टी बनाने के लिए इसमें अल्यूमिनियम और फाइबर का ज्यादा इस्तेमाल किया गया है। जिससे कार का वजन 200 किलो हुआ। अधिकतर फार्मूला वन कारों का वजन 200 से ज्यादा होता है।

टीम यूके और इटली में दर्ज कर चुकी है जीत :

टीम सृजन की शुरुआत 2007 से हुई थी। पहली फार्मूला वन रेसिंग यूके में हुई और टीम ने पाचवां स्थान पाया। इसके बाद 2013 में इटली में रेसिंग कर भारत से दूसरे नंबर की टीम बीआईटी बनी। लगातार 2015 व 2016 में बेस्ट टीम बनने का मौका मिला और जनवरी 2017 को कोयंबटूर में हुए फार्मूला वर रेसिंग में छठा स्थान प्राप्त किया है।

बहुत मायने में है अलग :

यह कार शून्य से 100 की रफ्तार सिर्फ पांच सेकेंड में तय कर सकती है। कार्बन फाइबर से इसके वजन को हल्का बनाया गया है। आसान परिचालन के लिए बटन सिस्टम गियर बनाया गया है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से कार को इलेक्ट्रिकल कंट्रोल यूनिट (इसीयू) से जोड़ा गया है। जिससे शॉट सर्किट जैसी समस्या नहीं हो।

पांच ड्राइवरों की है टीम :

कार चलाने के लिए छात्रों ने महीनों ट्रेनिंग ली है। इसके मुख्य चालक मयंक रेड्डी, सिद्धांत पटेल, सुमित कुमार, साहिल कुमार व गौतम हैं।

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