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रांची में कुटे से कचहरी के बीच दौड़ेगी पहली मेट्रो

रांची में कुटे से कचहरी के बीच दौड़ेगी पहली मेट्रो

रांची मेट्रो को दौड़ने में दो साल का वक्त लगेगा। इसके निर्माण पर चार हजार करोड़ की लागत आएगी। दिल्ली सरकार की कंपनी डिम्ट्स ने इसका डीपीआर तैयार किया है। इसमें निर्माण की समय-सीमा दो साल रखी गई है। नगर विकास विभाग की ओर से तैयार कराए डीपीआर के तहत पहले चरण में यह कोर कैपिटल एरिया के कुटे गांव से शुरू होकर कचहरी चौक तक जाएगी। कुटे गांव का यह स्थान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के समूह मुख्यालय के पास है। 16.25 किलोमीटर के इस मेट्रो कॉरीडोर में 17 स्टेशन और एक डिपो होंगे। डिपो कुटे गांव के पास होगा। जहां मेट्रो कोच खड़े किए जाएंगे। इनके मेंटेनेंस की व्यवस्था भी वहीं होगी। मेट्रो कॉरीडोर का चुनाव महत्वपूर्ण कारोबारी केंद्रों और सरकारी कार्यालयों को जोड़ने की दृष्टि से किया गया है। यह कोर कैपिटल एरिया,  हाईकोर्ट,  स्मार्ट सिटी, एयरपोर्ट, रांची और हटिया रेलवे स्टेशनों, मेन रोड के वाणिज्यिक केंद्रों और रांची विश्वविद्यालय को जोड़ेगा।
यह होगा रूट
कुटे गांव-सचिवालय-जेएससीए स्टेडियम-विश्वनाथ शाहदेव चौक-स्मार्ट सिटी-हटिया स्टेशन-सेक्टर टू-बिरसा चौक-हिनू चौक-शिवपुरी-मेकन-राजेंद्र चौक-रांची रेलवे स्टेशन-सैनिक मार्केट-अलबर्ट एक्का चौक-यूनिवर्सिटी-कचहरी चौक।
2021 तक का अनुमान
डीपीआर में अनुमान व्यक्त किया गया है कि 2021 तक हर दिन एक लाख 90 हजार यात्री मेट्रो की सवारी करेंगे। इसकी आमदनी का सबसे बड़ा स्रोत यात्री भाड़ा होगा। इसके अलावा स्टेशनों के कारोबारी उपयोग से होने वाली आय भी आमदनी का बड़ा जरिया होगी। वहीं स्टेशनों के बाहर विकसित किए जाने वाले ट्रांजिट आधारित विकास क्षेत्र से भी राजस्व की वसूली होगी।
ट्रांजिट आधारित विकास
ट्रांजिट आधारित विकास का मतलब सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के पास ही कार्यालय, आवासीय परिसर और कारोबारी केंद्र विकसित करना है। मेट्रो कॉरीडोर के किनारे सात जगह ट्रांजिट आधारित विकास का क्षेत्र विकसित किया जाएगा। ट्रांजिट आधारित विकास की परियोजना अगले 20 सालों में विकसित की जाएगी।
फीडर सर्विस की भी होगी व्यवस्था 
मेट्रो की उपयोगिता बढ़ाने के लिए सरकार फीडर सर्विस की व्यवस्था करेगी। यानी मेट्रो स्टेशन से कार्यालयों, आवासीय इलाकों और कारोबारी इलाकों तक के लिए बस, मिनी बस या दूसरी फीडर सेवाओं की भी व्यवस्था की जाएगी। इससे अंतिम मील तक की कनेक्टिविटी की अवधारणा साकार होगी। डीपीआर में इसे प्रस्तावित किया गया है। फीडर नेटवर्क के लिए सरकार अलग से अध्ययन कराएगी।
निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना मकसद
रांची शहर में मेट्रो चलाने का मकसद निजी वाहनों पर निर्भरता कम कर यहां के यात्रियों को सुरक्षित और आरामदेह यात्रा का साधन मुहैया कराना है। इस परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने झारखंड अर्बन ट्रांसपोर्ट कंपनी लिमिटेड यानी जुटकोल नामक कंपनी बनाई है। यह कंपनी मेट्रो परियोजना के डिजाइन से लेकर जमीन पर उतारने और उससे जुड़ी सुविधाओं को विकसित करने तक का काम करेगी। मेट्रो परियोजना के जमीन पर उतरने के बाद इसके संचालन और रखरखाव का काम भी इसी के जिम्मे होगा।

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  • Web Title:First Metro to run from Kute to court