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रात के 12-1 बजे अस्पताल से निकलकर पानी का जुगाड़ करतीं हैं महिला स्वास्थ्यकर्मी

स्वास्थ्य विभाग द्वारा शहरी इलाकों में लोगों को स्वास्थ्य की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन जब ग्रामीण इलाकों में आज भी लोगों को उचित...

रात के 12-1 बजे अस्पताल से निकलकर पानी का जुगाड़ करतीं हैं महिला स्वास्थ्यकर्मी
हिन्दुस्तान टीम,रांचीWed, 19 Jun 2024 01:15 AM
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अड़की, प्रतिनिधि। स्वास्थ्य विभाग द्वारा शहरी इलाकों में लोगों को स्वास्थ्य की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन जब ग्रामीण इलाकों में आज भी लोगों को उचित स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है। अड़की प्रखंड मुख्यालय से 14 किमी दूर बिरबांकी में भाजपा सरकार के कार्यकाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भव्य भवन बनाया गया। साथ में डॉक्टर और स्टाफ के दस से ज्यादा आवासों का निर्माण किया गया। अन्य अधारभूत सुविधाओं से बिरबांकी के अस्पताल को लैस किया गया। इसके बावजूद आज यहां सप्ताह के सातों दिन चिकित्सक नहीं रहते, जिससे लोगों को इलाज कराने में परेशानी होती है, उन्हें गांव में अस्पताल रहने के बावजूद अड़की, खूंटी और मुरहू के अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ती है। हालाकि अस्पताल में 24 घंटे एक जीएनएम, दो एएनएम और सफाईकर्मी रहती हैं। ये सभी महिला कर्मी हैं, जो अस्पताल में रहकर अपनी डियूटी करती हैं। इन दिनों अस्पताल में मलेरिया, लूज मोशन व सर्दी-खांसी के मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। अस्पताल में तीन दिन सोमवार, गुरुवार और शनिवार को डॉक्टर आते हैं। शेष दिनों को अस्पताल आए मरीजों का इलाज नर्स ही करतीं हैं।

पानी के लिए महिला स्वास्थ्यकर्मी परेशान

अस्पताल में रह रहीं महिला स्वास्थ्यकर्मी इन दिनों पानी के लिए परेशान हैं। अस्पताल परिसर में किए गए डीप बोरिंग में समर सिब्बल और पाईप अंदर गिर गया है, जिसके कारण बोरिंग बेकार हो गया है। इस स्थिति में सड़क के दोनो किनारे बांस गाड़कर उसके उपर से पाईप पार किया है। यह पाईप निर्माणाधीन एकलव्य विद्यालय परिसर के बारिंग से जुड़ा है। महिला कर्मी रात के बारह-एक बजे जाकर मोटर स्र्टाट करतीं हैं, तब उन्हें पानी मिलता है। दिन में भवन का काम चलता है, इस कारण उन्हें पानी नहीं दिया जाता है। महिला स्वास्थ्यकर्मी कहतीं हैं रात में उन्हें काफी डर लगता है, लेकिन पानी के लिए रात को अस्पताल से बाहर सुनसान स्थान पर जाकर मोटर चालू करना पड़ता है।

दो दिनों के अंदर बिरबांकी अस्पताल में पानी की समस्या को दूर कर दिया जाएगा। अस्पताल में सातों दिन चिकित्सक रहें, इसके लिए चिकित्सकों को बाध्य किया जाएगा।

: डॉनागेश्वर मांझी, सिविल सर्जन, खूंटी।

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