यूजीसी ने अनिवार्य की एंटी-रैगिंग और आंतरिक शिकायत समितियां
रांची में, उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और कल्याण के लिए कदम उठाए गए हैं। इसमें कैंपस में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने, रैगिंग और यौन उत्पीड़न पर रोक लगाने, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। यूजीसी ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

रांची, विशेष संवाददाता। विश्वविद्यालयों, कॉलेजों व अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और समग्र कल्याण को लेकर प्रयास शुरू किए गए हैं। इसमें कैंपस में सुरक्षित, समावेशी और सहयोगात्मक वातावरण सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि विद्यार्थी बिना किसी भय के अपनी पढ़ाई और व्यक्तित्व विकास पर ध्यान केंद्रित कर सकें। इसके तहत रैगिंग, यौन उत्पीड़न, भेदभाव और अन्य अनुचित गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता बताई गई है। साथ ही, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, काउंसिलिंग सेवाओं और शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत बनाने पर भी बल दिया जा रहा है।
इस संबंध में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और समग्र कल्याण सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके अनुसार, एंटी-रैगिंग नियम 2009, उच्च शिक्षण संस्थानों में समान अवसर को बढ़ावा देने संबंधी नियम-2012, यौन उत्पीड़न की रोकथाम एवं निवारण नियम 2015 और छात्र शिकायत निवारण नियम-2023 के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया है। इसके अलावा फीस वापसी, मूल प्रमाणपत्रों को रोके न रखने और विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने संबंधी दिशानिर्देशों का पालन भी सुनिश्चित करने को कहा गया है।यूजीसी ने सभी संस्थानों को एंटी-रैगिंग कमेटी, आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी), समान अवसर प्रकोष्ठ और छात्र शिकायत निवारण प्रकोष्ठ (एसजीआरसी) का गठन कर उनके नियमित संचालन पर बल दिया है। साथ ही, इन समितियों की जानकारी संस्थानों की आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित रूप से अपडेट करना अनिवार्य बताया गया है। इसके अतिरिक्त काउंसलिंग सेवाओं को मजबूत करने, मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराने और संवेदनशीलता व जागरुकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।परिसर की सुरक्षा को लेकर सीसीटीवी निगरानी, पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया है। साथ ही संस्थानों को समिति बैठकों और की गई कार्रवाइयों का उचित रिकॉर्ड रखने और दिव्यांग व कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को आवश्यक सहयोग प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
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