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मस्जिदों में पढ़ी गई ईद उल अजहा की नमाज, देश की खुशहाली व अमन चैन की मांगी गई दुआएं

खूंटी शहर समेत जिले भर के मस्जिदों में सोमवार को ईद उल अजहा की नमाज पढ़ी गई। इस दौरान नमाजियों ने खूंटी समेत देश के लिए अमन चैन और खुशहाली की दुआएं...

मस्जिदों में पढ़ी गई ईद उल अजहा की नमाज, देश की खुशहाली व अमन चैन की मांगी गई दुआएं
हिन्दुस्तान टीम,रांचीTue, 18 Jun 2024 01:45 AM
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खूंटी, संवाददाता। खूंटी शहर समेत जिले भर के मस्जिदों में सोमवार को ईद-उल-अजहा की नमाज पढ़ी गई। इस दौरान नमाजियों ने खूंटी समेत देश के लिए अमन-चैन और खुशहाली की दुआएं मांगी। जिले में त्याग, बलिदान और प्रेम का त्योहार पूरी भाचारगी के साथ सौहार्द्धपूर्ण माहौल में मनाया गया। शहर के जामा मस्जिद में दो पालियों में, मस्जिदे जोहरा, मदीना मसजिद और कौसर मस्जिद में एक-एक पाली की नमाज पढ़ी गई। मस्जिदों में नमाज अदा करने के बाद लोग कब्रिस्तान गए, जहां अपने पुरखों और सगे संबंधियों के कब्र पर फातिहा पढ़ा, जिसके बाद कुर्बानी की रस्म अदा की गई।
जामा मस्जिद के इमाम मो मोहिबुल्लाह ने कहा कि मुस्लिम धर्म के लिए बकरीद का त्योहार काफी महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि ईद-उल-अजहा का अर्थ त्याग वाली ईद है। इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग ईदगाह और मस्जिदों में जमात के साथ विशेष नमाज अदा करते हैं। इमाम साहब ने बताया कि इस्लाम धर्म की मान्यता के अनुसार पैगंबर हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने कुर्बानी देने की प्रथा की शुरुआत की थी। तभी से इस परंपरा को निभाया जा रहा है। इस पर्व से जुड़ी कई मान्यताएं भी है। इस्लाम के अनुसार हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम अल्लाह के पैगंबर थे। ऐसा कहा जाता है कि एक बार अल्लाह ने हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम से अपने सबसे प्यारी चीज को कुर्बान करने का हुक्म दिया। पैगंबर साहब को अपना एकलौता पुत्र इस्माइल सबसे अधिक प्रिय था। लेकिन खुदा के हुक्म के अनुसार उन्होंने अपने प्रिय इस्माइल को कुर्बान करने का मन बना लिया।

इस बात से इस्माइल भी खुश थे कि वह अल्लाह की राह पर कुर्बान होगा। जब हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम अपने बेटे इस्माइल अलैहिस्सलाम को कुर्बानी देने लगे तो उसकी जगह एक दुंबा कुर्बान हो गया। इस तरह इस्माइल बच गए तभी से हर साल पैगंबर साहब द्वारा दी गई कुर्बानी की याद में बकरीद मनाई जाती है। इस्लाम के अनुसार जिस व्यक्ति के पास पैसा ना हो या उस पर किसी तरह का कोई कर्ज हो तो वह कुर्बानी नहीं दे सकता। कुर्बानी देने वाले पर किसी तरह का कोई कर्ज नहीं होना चाहिए, तभी उसकी कुर्बानी मानी जाती है। जिस पशु की कुर्बानी दी जा रही है वह पूरी तरह से स्वस्थ होना चाहिए। कुर्बानी के बाद मांस के तीन हिस्से करने जरूरी होते हैं। इनमें से एक हिस्सा खुद के इस्तेमाल के लिए रखा जाता है, दूसरा गरीबों के लिए और तीसरा संबंधियों व पड़ोसियों में बांटा जाता है।

मस्जिदों में अकीदत के साथ अदा की गयी बकरीद की नमाज:

तोरपा-कुर्बानी का त्यौहार ईद उल अजहा (बकरीद) सोमवार को तोरपा एवं आसपास के इलाकों में अकीदत के साथ मनाया गया। बकरीद को लेकर मुस्लिम धर्मावलंबियों में काफी उत्साह देखा गया। सुबह से ही मस्जिदों में लोग नमाज के लिए जुटने लगे थे। तोरपा मस्जिद-ए-अक्शा व मेन रोड स्थित मस्जिद में पूरी अकीदत के साथ ईद-उल-अजहा की नमाज अदा की गयी। फिर एक-दूसरे से गले मिलकर बधाई दी। नमाज के बाद बकरों की कुर्बानी दी गयी। अजुंमन इस्लामिया के सदर अख्तर खान व मस्जिद कमेटी के सदर कलीम खान ने बताया कि कुर्बानी का इस्लाम में धर्म में बड़ा महत्व है। अल्लाह के प्रति सच्चा समर्पण ही कुर्बानी है। तोरपा के अलावा तपकरा, कोचा, रोडो में भी बकरीद शांतिपूर्ण माहौल में मनाया गया। इधर बकरीद को लेकर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। चौक-चौराहों पर पुलिस के जवान तैनात थे।

बकरीद पर्व शांति पूर्वकढंग से संपन्न:

कर्रा प्रखंड में अल्पसंख्यक समुदाय का कुर्बानी का पर्व बकरीद सोमवार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। इस मौके पर कर्रा और जरियागढ़ थाना क्षेत्र के गांव में सुबह में मुस्लिम धर्मावलंबियों ने मस्जिद और ईदगाह में जाकर बकरीद की नमाज अदा की। नमाज के बाद सभी ने एक-दूसरे से गले मिलकर बकरीद पर्व का बधाई दिये। इस मौके पर कर्रा सदर मेहंदी हसन ने सभी मुस्लिम भाईयों को मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम दिया। उन्होंने कहा कि बकरीद ऐसा पर्व है जो सभी में मोहब्बत का जज्बा पैदा करता है। इस दौरान मस्जिद के बाहर पुलिस प्रशासन मुस्तादी के साथ तैनात देखा गया।

बकरीद की नमाज में अल्लाह ताला से क्षेत्र की अमन चैन की दुआ मांगी गई:

रनिया प्रखंड क्षेत्र के सोदे में सोमवार को शांतिपूर्ण एवं आपसी भाईचारे के साथ बकरीद का त्योहार मनाया गया। इस अवसर पर सोमवार की सुबह सात बजकर बीस मिनट पर सोदे ईदगाह में इमाम मौलाना सफीक साहब एवं सदर जिब्राइल मिंया की अगुवानी में ईद-उल-अजहा का नमाज अदा की गई। इसके साथ ही अल्लाह ताला से क्षेत्र की अमन चैन एवं शुभकामना हेतु दुआ मांगी गयी। मौके पर सेक्रेटरी नौशाद अंसारी, नईम खान, माजीद मियां, इमरोज अंसारी, मोजिल जमाल मियां सहित काफी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल थे। तदोपरांत सभी ने अपने अपने सामर्थ्य के अनुसार अपने घरों में कुर्बानी की रश्म अदा किया। इसके साथ ही सभी ने एक-दूसरे को गले लगाकर बकरीद की बधाइयां दी। इस अवसर पर शांतिपूर्ण तरीक़े से त्यौहार को सम्पन्न हेतु रनिया थाना प्रभारी विकास कुमार जायसवाल अपने सशस्त्र बल के जवानों के साथ दिनभर पूरे क्षेत्र में सक्रिय रहे।

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