सूबे के 600 वित्तरहित संस्थानों में शैक्षणिक हड़ताल, ठप रहा पठन-पाठन
रांची में 600 वित्तरहित इंटर कॉलेज और विद्यालयों में चार स्तरीय जांच के विरोध में शुक्रवार को शैक्षणिक हड़ताल रही। शिक्षकों ने नारेबाजी की और चार लाख बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित हुआ। मोर्चा ने इसे अवैध वसूली का प्रयास बताते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने का निर्णय लिया है।
रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। राज्य के 600 वित्तरहित इंटर कॉलेज, उच्च विद्यालय, संस्कृत विद्यालयों और मदरसा में चार स्तरीय जांच के विरोध में शुक्रवार को शैक्षणिक हड़ताल रही। इस दौरान संस्थानों के मुख्य द्वार पर ताला लटका रहा और शिक्षक व कर्मचारी गेट पर नारेबाजी करते रहे। हड़ताल के कारण राज्यभर के चार लाख से अधिक बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित हुआ और इसमें लगभग 7,000 से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया। शिक्षकों का आरोप है कि चार स्तरों पर जांच की कार्रवाई केवल अवैध वसूली के उद्देश्य से की जा रही है। पूर्व में एक स्तर पर जांच के बाद अनुदान की राशि संस्थानों को भेज दी जाती थी, लेकिन इस वर्ष अनुदान के लिए चार चरणों में जांच प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के नेताओं ने कहा कि पूर्व की व्यवस्था में जहां एक स्तर पर भ्रष्टाचार की गुंजाइश थी, अब उसे चार स्तरों पर फैलाया जा रहा है। मोर्चा का तर्क है कि संबद्ध डिग्री कॉलेजों की कोई जांच नहीं होती और वे केवल प्रपत्र भरकर विभाग को भेजते हैं, जिसके आधार पर विश्वविद्यालयों को अनुदान मिल जाता है। मोर्चा ने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। उन्होंने शिक्षा सचिव से मांग की है कि चार स्तरीय जांच अविलंब रोकी जाए और पूर्व की भांति एक स्तर पर जांच कराई जाए।

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