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बारिश नहीं होने के कारण खेतों में अब तक नहीं गिरे बिचड़े के बीज

लगातार चढ़ते पारे के कारण खेत सूखे पड़े हैं। खूंटी जिले में प्री मानसून की बारिश नहीं होने के कारण अब तक किसी भी किसान के द्वारा अपने खेतों में...

बारिश नहीं होने के कारण खेतों में अब तक नहीं गिरे बिचड़े के बीज
हिन्दुस्तान टीम,रांचीMon, 17 Jun 2024 02:00 AM
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खूंटी, संवाददाता। लगातार चढ़ते पारे के कारण खेत सूखे पड़े हैं। खूंटी जिले में प्री मानसून की बारिश नहीं होने के कारण अब तक किसी भी किसान के द्वारा अपने खेतों में बिचड़े के बीज नहीं डाले गए हैं। चारों ओर सूखे खेत और धूप से झुलसे घास-पात नजर आ रहे हैं। हालांकि पिछले वर्ष भी खूंटी जिले में विलंब से बारिश होने के कारण किसानों ने देर से खेती-बारी का काम प्रारंभ किया था। इस बार भी पिछली बार जैसी स्थिति अब तक नजर आ रही है। हालांकि पिछले वर्ष खूंटी जिले में धान की खेती देर से शुरू हुई थी, लेकिन कर्रा के बकसपुर पंचायत को छोड़ जिले में धान की अच्छी उपज हुई थी। इस वर्ष मौसम की बेरूखी देख किसान अंदाजा लगा रहे हैं कि पर्यावरणीय बदलाव के कारण अगर देर से बारिश हुई, तो धान के फसल प्रभावित होंगे।

कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डॉ राजन चौधरी ने किसानों को सलाह दी है कि धान की सीधी बुआई के लिए कम समय में तैयार होने वाली किस्मों जैसे सहभागी, आईआर-64, डीआरटी-1, स्वर्णा श्रेया, बिरसा विकास धान-110 या 111, वंदना, ललाट आदि में से किसी एक किस्म का चुनाव करें। जो किसान अभी तक धान का बिचड़ा तैयार करने के लिए बीज स्थली में बीज नहीं डाल पायें हैं, वे जल्द बीज स्थली में बीज डालें और बीज स्थली को जमीन की सतह से थोड़ा ऊपर बनायें।

मड़ुआ की खेती करने वाले किसानों को सलाह दी गई है कि उन्नत किस्म ए-404, बिरसा मडुआ-2, बिरसा मडुआ-3, जीपीयू-28, जीपीयू-67, भीएल-149 आदि में से किसी एक किस्म का चुनाव करें और बारिश होने का इंतजार करें।

बारिश नहीं होने के कारण हम पूरे गांव के किसान परेशान हैं। हम हर दिन आसमान की ओर ताकते हैं। इंटरनेट पर बारिश कब होगी, यह सर्च करते हैं। अब हमें सिर्फ बारिश का इंतजार है। हमारी तैयारी पूरी है।

: राहुल महतो, जामटोली।

पूर्व के वर्षों में प्री मानसुन में होने वाली बारिश के कारण हम अब तक खेतों में बिचड़े के लिए बीज डाल देते थे, लेकिन इस वर्ष प्री मानसून की बारिश भी नहीं हुई, जिससे परेशानी बढ़ी है।

: अखिल मांझी, हेसेल।

अड़की इलाके में पहाड़, जंगल सब जल रहे हैं। साल के पेड़ों के पत्ते धूप में झुलस गए हैं। खेत तप रहे हैं। अब तक एक किसान ने भी बिचड़ा के लिए खेत में धान के बीजों का छिड़काव नहीं किया है।

: जवरा पाहन, बिरबांकी।

इस वर्ष अब तक बारिश नहीं होने के कारण किसी भी किसान के द्वारा गोड़ा धान, मड़ुआ, गंगई आदि की खेती नहीं की गई है। देर से बारिश के कारण ये फसल प्रभावित होंगे।

: भोंज नाग, मारंगहादा।

कृषि विभाग के आत्मा परियोजना के उपनिदेशक अमरेश कुमार ने कहा कि धान की खेती में अभी देर नहीं हुई है। हां इतना जरूर है कि छींटा धान की खेती पर इसका असर पड़ेगा। अब तक जिले में किसी भी किसान ने बिचड़े के लिए धान के बीज खेतों में नहीं गिराया है। प्री मानसून की बारिश नहीं होने के कारण छींटा धान के साथ साग-सब्जियों की खेती पर असर पड़ा है। गर्मी के कारण सब्जी का फलन कम हो गया है। लौकी, कद्दू, करेला, तोरई समेत अन्य सब्जी की खेती प्रचंड गर्मी के कारण प्रभावित है। धान की खेती के लिए तो अभी दो-चार दिन पहले से ही बीज का वितरण प्रारंभ किया गया है।

65,000 हेक्टेयर में होती है धान की खेती

पिछले वर्ष 65,000 हेक्टेयर में खेती हुई थी, उत्पादन 95 प्रतिशत हुआ था। पिछले वर्ष खंड वृष्टि के कारण सूखे का असर एकमात्र कर्रा के बकसपुर पंचायत में पड़ा था।

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