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जिले में करोड़ों रुपयों की लागत से बने दर्जनों भवन पड़े हैं बेकार

जिले में करोड़ों रूपयों की लागत से बने दर्जनों भवन बनने के बाद उपयोग नहीं होने के कारण बेकार पड़े हैं। आम लोग इन भवनों को देख कहते हैं कि ये भवन...

जिले में करोड़ों रुपयों की लागत से बने दर्जनों भवन पड़े हैं बेकार
हिन्दुस्तान टीम,रांचीSat, 25 May 2024 01:15 AM
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खूंटी, कर्रा, मुरहू, हिटी। जिले में करोड़ों रुपयों की लागत से बने दर्जनों भवन बनने के बाद उपयोग नहीं होने के कारण बेकार पड़े हैं। आम लोग इन भवनों को देख कहते हैं कि ये भवन अधिकारियों, अभियंताओं व ठेकेदारों के फायदे के लिए बनाए गए हैं। अस्पताल, स्कूल, तकनीकी शिक्षण संस्थान, पंचायत सचिवालय भवन, बस स्टैंड, स्टेट लेबल कॉपरेटिव ट्रेनिंग सेंटर, मार्केट कम्पलेक्स आदि के लिए बनाए गए भवन बेकार पड़े हुए हैं। खूंटी शहर और सदर प्रखंड क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में नजर डालें तो खूंटी-तमाड़ रोड पर बस स्टैंड 10-12 वर्षों पूर्व बना, लेकिन इसका इस्तेमाल नहीं होता। अब यहां विदेशी शराब की दुकान चलती है।
सदर प्रखंड के एरेंडा गांव में करोड़ों रुपए की लागत से बना पॉलिटेक्निक भवन लगभग आठ वर्षों से बेकार पड़ा है। कोविड काल में इसे कोविड सेंटर बनाया गया था। इसके बाद से यह खंडहर बनकर रह गया है। नॉलेज सिटी परिसर में 25 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय के काम पर सरकार ने रोक लगा दी है। खूंटी के फुदी गांव में बना राज्य स्तरीय सहकारिता प्रशिक्षण केंद्र का भव्य भवन जिसमें प्रशिक्षण केंद्र, छात्रावास और प्रशासनिक भवन है, छह वर्षों से बेकार पड़ा है।

जिले में दस वर्षों पूर्व बने पंचायत सचिवालय भवनों में से 50 प्रतिशत भवनों में पंचायत सचिवालय का नियमित संचालन नहीं होता है। इस कारण पंचायत के कार्यों का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाता है। गांवों के लोग उस काम के लिए प्रखंड कार्यालयों का चक्कर लगाते हैं, जो काम उनके पंचायत में ही होना संभव हैं। जिले में पंचायत सचिवालय भवनों के निर्माण और आधारभूत संरचनाओं में सरकार ने लगभग 200 करोड़ से ज्यादा रुपए खर्च की थी।

खूंटी शहर के कदमा-कमंता में तीन-चार बड़े-बड़े गोदामों का निर्माण किया गया, जिसका उपयोग कभी-कभी बैडमिंटन खेलने और विधानसभा चुनाव के दौरान स्ट्रांग रूम और मतगणना केंद्र के रूप में होता है।

कर्रा के कोसम्बी में करोड़ों रुपया से बना मार्केट कांप्लेक्स बेकार:

जिला परिषद द्वारा कर्रा प्रखंड के कोसम्बी मौजा में करोड़ों रुपए खर्च का 54 दुकानों वाला एक वृहद मार्केट कांप्लेक्स बनाया गया है। जिसमें एक भी दुकानें नहीं खुली। आज यह मार्केट कांप्लेक्स गांव के लोगों के लिए गोहाल का काम करता है, लोग यहां बैल-बकरी बांधने का काम करते हैं। वहीं संपूर्ण कांप्लेक्स क्षेत्र में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। इस मार्केट का नामकरण लड़ाऊ कच्छप के नाम पर किया गया है।

लोग दुकान लेना नहीं चाहते :

लड़ऊ कच्छप मार्केट कांप्लेक्स में दुकानों के आबंटन के लिए कई बार जिला परिषद के द्वारा टेंडर निकाले जा चुके हैं, लेकिन कोई आवेदन नहीं आता। कारण है कि मार्केट कांप्लेक्स मुख्य बाजार से दूर सुनसान स्थान पर बनाया गया है, जहां दुकान खुलने पर ग्राहक नहीं पहुंच सकेंगे। कर्रावासी कहते हैं कि यह कांप्लेक्स अधिकारी, अभियंता और ठेकेदार के फायदे के लिए बनाया गया था।

मुरहू के कई सरकारी भवन उपयोगविहीन:

मुरहू में कई सरकारी भवन उपयोगविहीन होने के कारण जर्जर हो रहे हैं। कई स्थानों में बने भवन लोगों के लिए भी अबुझ पहेली बन गई है। जिसमें निर्माण के बाद भी उदघाटन नहीं होने के बाद भवन जर्जर हो गए। मुरहू के हेठगोवा में चिकित्सा विभाग के लिए बना भवन, गुटिगड़ा में बना सामुदायिक भवन, मुरहू के बिन्दा में बना तहसील कचहरी समेत कई भवन अब जर्जर हो चुके हैं। एनएच 75ई के किनारे बिन्दा में बने तहसील कचहरी में उगी झाड़ियां अब लोगों को भी डराने लगी है।

रनिया में कई भवन पड़े हैं बेकार

रनिया प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न जगहों में सरकारी पैसों का दुरुपयोग करते हुए लाखों-करोड़ों रुपए की लागत से कई छोटे-बड़े भवन बेकार पड़े हुए हैं। जिसे लेकर स्थानीय लोगों के बीच काफी नराजगी देखने को मिल रही है। करोड़ों की लागत से बने एसएस प्लस टू, रनिया परिसर में कल्याण विभाग से सैकड़ों बेड का छात्रवास भवन विगत तीन वर्षों से बेकार पड़ा है। उसमे न तो चहारदीवारी है न ही कोई गार्ड। भवन अब दरकने लगा है। इसी तरह प्रखंड परिसर में दो गोदाम, एक कृषि तकनीकी केंद्र, कभी करस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय संचालित हो रहे भवन, जिला परिषद द्वारा लाखों रुपए की लागत से बने दुकानें, शौचालय एवं स्नानगृह, प्रखंड परिसर में बने गेस्ट हाउस के अलावे सरबो एवं हालोम गांव में निर्माणधीन स्वास्थ्य उप केंद्र जैसे कई भवन अब बिना देख-रेख एवं रख-रखाव के खंडहर के रूप में तब्दील होते जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार ये भवनों का निर्माण सिर्फ कमीशन खोरी एवं सरकारी रुपयों का बंदरबांट का जरिया एवं सरकारी रुपयों की बर्बादी है। इससे जनता को कोई फायदा नहीं हो रहा है। सरकार को इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

जिन विभागों के भवन हैं, उनके द्वारा भवनों का उपयोग करने की प्रक्रिया चल रही है। जिला परिषद भी मार्केट कांप्लेक्स को प्रारंभ करने की प्रक्रिया जल्द शुरू करेगी।

: लाकेश मिश्रा, उपायुक्त।

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