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7 मार्च, 2021|3:01|IST

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उत्सव मनाने का नहीं आत्ममंथन का दिन: गवर्नर

उत्सव मनाने का नहीं आत्ममंथन का दिन: गवर्नर

आदिवासी दिवस सिर्फ उत्सव मनाने के लिए नहीं बल्कि आत्ममंथन करने का दिन भी है। इस दिन इस बात पर विचार करें कि हमने समाज के लिए क्या किया है। जब तक आदिवासी समाज का हर व्यक्ति जागरूक नहीं होगा, तब तक स्थितियां नहीं बदलेंगी। राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू गुरुवार को रांची समाहरणालय में आदिवासी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। समारोह का आयोजन अनुसूचित जाति-जनजाति सरकारी कर्मचारी संघ ने किया था।

लोग स्मार्ट होंगे, तभी गांव बनेंगे स्मार्ट

राज्यपाल ने कहा कि राज्य और गांव तभी स्मार्ट होंगे जब वहां के रहने वाले लोग स्मार्ट बनेंगे। केवल शौचालय बना देने से गांव स्मार्ट नहीं होगा। प्राथमिक शिक्षा के साथ-साथ गांव के लोगों को उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित करना होगा। पलायन और कुपोषण राज्य की सबसे बड़ी समस्या है। गांव से बड़े तादाद में लोग रोजी-रोटी की तलाश में बाहर जा रहे हैं। बेटियां बेची जा रही हैं। कम उम्र में बच्चियों की शादी हो रही है। इन सब पर गौर करने की जरूरत है।

हड़िया-दारू से दूर रहें

राज्यपाल ने कहा कि आदिवासी आज भी अपनी संस्कृति बचा कर रखे हैं। आदिवासी समाज में तमाम अच्छाइयां हैं पर, एक खराबी भी है। हड़िया के सेवन से दूर रहें, यह अलग बात है कि पूजा व सामारोह में हड़िया को प्रसाद के तौर पर चढ़ाया जाता है। यह परंपरा है पर आदिवासी समाज हड़िया से दूर रहें। इसे प्रसाद के तौर पर लें। बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दे सकते हैं तो अच्छी जिंदगी तो दे सकते हैं। सरकारी स्तर पर योजनाएं चल रही हैं, लेकिन हमें सरकार पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए। हमें भी अपने दायित्व का निर्वहन करना चाहिए।

इस अवसर पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर, झारखंड राज्य अजजा सरकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष तुर्तन लुगून, डीडीसी दिव्यांशु झा, अपर समाहर्ता अंजनी कुमार मिश्र, एनडीसी राजेश कुमार, एडीएम लॉ एंड ऑर्डर अखिलेश कुमार, कार्यपालक दंडाधिकारी रविशंकर, सागर कुमार, सुषमा बड़ाईक, एडीएम पूनम झा, जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी गीता चौबे व श्वेता गुप्ता समेत सारे कर्मचारी मौजूद थे।

सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन

समाहरणालय की महिला व पुरुष कर्मचारियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया। मांदर की थाप पर लाल पाड़ वाली साड़ी पहन कर लोकनृत्य किया। वहीं, सिल्ली के बनता प्रखंड से आये कलाकारों ने भी आकर्षक नृत्य पेश किया। इसके अलावा नुक्कड़ नाटक का भी आयोजन हुआ। इसमें बच्चों ने नाटक के जरिये बच्चियों की हो रही ट्रैफिकिंग के बारे में जानकारी दी।

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  • Web Title:Do not celebrate the day of self-determination: Governor