
झारखंड के पैक्स हुए हाईटेक, 1500 समितियां कंप्यूटरीकृत
झारखंड में प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) को डिजिटल बनाने के लिए नाबार्ड के नेतृत्व में तेजी से कंप्यूटरीकरण का कार्य चल रहा है। अब तक लगभग 1,500 पैक्स को कंप्यूटरीकृत किया गया है, और अगले वित्तीय...
रांची, संवाददाता। राज्य के प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) को डिजिटल रूप देने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। नाबार्ड (नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट) की अगुवाई में राज्य में पैक्स के कंप्यूटरीकरण का कार्य जारी है। राज्य में 4,000 से अधिक पैक्स में से अबतक करीब 1,500 पैक्स का कंप्यूटरीकरण किया जा चुका है। वहीं, अगले वित्तीय वर्ष तक अतिरिक्त 1,297 पैक्स को भी कंप्यूटरीकृत कर दिया जाएगा। पैक्स कंप्यूटरीकरण से किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं को कई स्तरों पर सुविधा मिलेगी। अब पैक्स से जुड़ी वित्तीय लेनदेन, खाद-बीज वितरण, ऋण वितरण, वसूली, भंडारण और खरीद-बिक्री जैसी सभी गतिविधियां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज होंगी।

इससे न केवल कार्यप्रणाली में तेजी आएगी बल्कि पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी। अधिकारियों का कहना है कि पहले जहां कई कार्य मैनुअल रूप से किए जाते थे, अब डेटा एकीकृत पोर्टल पर उपलब्ध रहेगा, जिससे निगरानी और ऑडिट की प्रक्रिया भी आसान होगी। नाबार्ड के अधिकारियों के मुताबिक, कंप्यूटरीकरण से पैक्स को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने का मार्ग भी प्रशस्त होगा। इससे किसानों को समय पर ऋण, सब्सिडी और सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा। साथ ही, डिजिटल रिकॉर्ड के कारण गलतियों और गड़बड़ियों की संभावना कम होगी। राज्य सरकार ने इस परियोजना को प्राथमिकता दी है ताकि ग्रामीण सहकारी संरचना को मजबूत किया जा सके। कंप्यूटरीकरण पूरा होने के बाद पैक्स न केवल पारदर्शी वित्तीय संस्थान के रूप में कार्य करेंगे, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्त केंद्र बनेंगे।

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