तत्कालीन खनन पदाधिकारी स्वयं की दर्ज प्राथमिकी को नहीं कर सके साबित, दो बरी
रांची में अवैध ईंट भट्ठा संचालित करने के मामले में न्यायिक दंडाधिकारी ने मुमताज अहमद और इम्तेयाज अंसारी को बरी कर दिया। जांच में आरोपों का समर्थन करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष विश्वसनीय तरीके से आरोप साबित नहीं कर सका।

रांची, संवाददाता। अवैध रूप से ईंट भट्ठा संचालित करने और सरकार को राजस्व क्षति पहुंचाने के आरोप से जुड़े मामले में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी राजेश रंजन कुमार की अदालत ने दो आरोपियों मुमताज अहमद और इम्तेयाज अंसारी को बरी कर दिया। मामला सदर थाना कांड संख्या 323/2021 से संबंधित था। प्राथमिकी के अनुसार, तत्कालीन जिला खनन पदाधिकारी सुबोध कुमार सिंह ने निरीक्षण के दौरान बड़गाईं क्षेत्र में संचालित दो ईंट भट्ठों को बिना लाइसेंस और बिना सरकारी अनुमति के संचालित पाया था। आरोप था कि भट्ठा संचालक सरकार को देय राजस्व का भुगतान नहीं कर रहे थे, जिससे सरकारी राजस्व की क्षति हो रही थी।
इस मामले में मुमताज अहमद और इम्तेयाज अंसारी के खिलाफ एमएमडीआर एक्ट तथा जेएमएमसी नियमावली के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने जांच के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान सूचक एवं तत्कालीन जिला खनन पदाधिकारी सुबोध सिंह आरोपों के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज और साक्ष्य पेश नहीं कर सके। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष ईंट भट्ठों के स्वामित्व, स्थल, सीमा और आरोपियों द्वारा संचालन संबंधी आरोपों को विश्वसनीय तरीके से साबित नहीं कर सका। अदालत ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड पर ठोस और पुष्ट साक्ष्य का अभाव है तथा मामला केवल सामान्य आरोपों तक सीमित रह गया। इन परिस्थितियों में अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए मुमताज अहमद और इम्तेयाज अंसारी को बरी कर दिया।
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