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केंद्र ने मजदूरों से काम मांगने का अधिकार छीना : के. राजू

केंद्र ने मजदूरों से काम मांगने का अधिकार छीना : के. राजू

संक्षेप:

कांग्रेस का मनरेगा बचाओ संग्राम, संघर्ष का आह्वान, बापू वाटिका से लोक भवन तक किया पैदल मार्च

Jan 05, 2026 07:56 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रांची
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रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा कानून को बदलने के विरोध में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में मनरेगा बचाओ संग्राम का आयोजन किया गया। इसमें मोरहाबादी के बापू वाटिका से लोक भवन तक पैदल मार्च निकाला गया और संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया गया। इसमें प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू, सह प्रभारी सीरी बेला प्रसाद, भूपेंद्र मारावी, प्रणव झा समेत मंत्री, विधायक, नेता-कार्यकर्ता शामिल हुए। कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने कहा कि मनरेगा के नये कानून में योजनाएं और जगह केंद्र सरकार तय करेगी। मजदूरों को काम मांगने का अधिकार नए कानून में नहीं है।

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नए कानून में ठेकेदारों से काम कराने का प्रावधान किया गया, जबकि मनरेगा में ऐसा नहीं था। मनरेगा के तहत यूपीए सरकार ने लोगों को 100 दिनों के रोजगार का हक कानून बना कर दिया था। काम का निर्धारण भी ग्राम पंचायत के हाथों में था। मनरेगा का मूल था कि पंचायत का विकास पंचायत के लोगों के हाथों से हो। मनरेगा से गरीब परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिली। गैर भाजपा शासित राज्य होंगे उपेक्षित : कमलेश प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि मनरेगा योजना में बदलाव से कई राज्यों की आर्थिक कमर टूट जाएगी। वर्तमान कानून में केंद्र सरकार ने साल के दो महीने काम पर प्रतिबंध लगा दिया है। गैर भाजपा शासित राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास दर काफी तेजी से गिरेगी। योजनाओं के चयन में केंद्र सरकार पर निर्भरता से पूरी तरह गैर भाजपा शासित राज्य उपेक्षित रहेंगे। सुरक्षा कानून को बदलने का प्रयास : प्रदीप यादव विधायक दल नेता प्रदीप यादव ने कहा कि केंद्र सरकार जनता के लिए लाए गए सभी सुरक्षा कानून को बदलने का प्रयास कर रही है। अगर कृषि के तीनों काले कानून वापस नहीं होते तो खाद्य सुरक्षा कानून भी समाप्त होता। भाजपा एक दिन वोट का अधिकार भी छीनेगी। नरेंद्र मोदी सरकार एसआइआर के माध्यम से इसे समाप्त करना चाहती है। नरेंद्र मोदी में निर्णय लेने की क्षमता नहीं : राजेश कच्छप कांग्रेस विधायक दल के उप नेता राजेश कच्छप ने कहा कि नरेंद्र मोदी में निर्णय लेने की क्षमता नहीं है। हर बार अदूरदर्शी निर्णय लेते हैं और कांग्रेस द्वारा विरोध करने के बाद उसे बदलते हैं। कांग्रेस ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को मजबूत करने के लिए मनरेगा कानून दिया। नाम के अपमान का हर मौका ढूंढती है भाजपा : सुखदेव सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि केंद्र सरकार अपनी कुंठा के कारण स्वतंत्रता सेनानियों के नाम के अपमान का हर मौका ढूंढ़ती है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके पूर्वजों का कोई योगदान नहीं था। इसी कुंठा में स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के नाम से भाजपा को चिढ़ है। गांधी के विचारों को लोगों के जेहन से मिटाने का प्रयास : किशोर वित्त मंत्री डॉ राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम अचानक नहीं बदला गया, बल्कि महात्मा गांधी के विचारों को इस देश के लोगों की जेहन से मिटाने का प्रयास किया है। यह सहयोग नहीं, बल्कि भाजपा शोधकर्ताओं द्वारा शोध करके खोजा गया नाम है। जबरन कानून थोपने से उसे वापस लेना होगा : इरफान स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि मोदी सरकार को कोई कानून लाने से पहले उस वर्ग को विश्वास में लेना चाहिए, जिसके लिए कानून लाया जा रहा है, जबरन कानून थोपने से उसे वापस लेना होगा। मनरेगा से गांव के मजदूरों की आर्थिक उन्नति हुई, पलायन में कमी आयी थी। 125 दिन का काम देने का वादा सिर्फ भुलावा : दीपिका ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि राज्य में वाटरशेड, बिरसा हरित ग्राम योजना, अबुआ आवास सहित कई योजना मनरेगा से जुड़ी हुई है। पिछले 11 वर्षों से देश में औसतन मनरेगा के तहत 45 से 50 दिन का काम लोगों को मिला है। 125 दिन का काम देने का वादा सिर्फ भुलावा है। केंद्र ने पूरी व्यवस्था छिन्न-भिन्न कर दी : शिल्पी कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि मनरेगा का केवल नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि कानून में बदलाव कर पूरी व्यवस्था को छिन्न-भिन्न कर दिया गया है। इसका प्रभाव निश्चित रूप से गांवों पर पड़ेगा। इसका मूल उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का था। मनरेगा बचाओ संग्राम में रहे मौजूद मनरेगा बचाओ संग्राम में मुख्य रूप से सांसद कालीचरण मुंडा, राजेश ठाकुर, प्रदीप बलमुचू, सुबोधकांत सहाय, फुरकान अंसारी, अनादि ब्रह्म, विधायक भूषण बाड़ा, नमन विक्सल कोंगाड़ी, कुमार जयमंगल, सुरेश बैठा, निशत आलम, ममता देवी, सोनाराम सिंकू, रामचन्द्र सिंह, श्वेता सिंह, बन्ना गुप्ता, केएन त्रिपाठी, राकेश सिन्हा, सतीश पॉल मुंजनी, रवीन्द्र सिंह, शमशेर आलम, ज्योति सिंह मथारू, जयशंकर पाठक, संजय लाल पासवान, राजीव रंजन प्रसाद, अमूल्य नीरज खलखो, अशोक चौधरी, सुरेन्द्र सिंह, आलोक दूबे, कुमार राजा, सोनाल शांति, कमल ठाकुर, सोमनाथ मुंडा, शहजादा अनवर, रमा खलखो, राकेश किरण महतो, सुनील सिंह, सतीश केडिया, परविन्द्र सिंह, शान्तनू मिश्रा आभा सिन्हा, गुंजन सिंह, केदार पासवान समेत अन्य मौजूद थे। विशिष्ठ आमंत्रित अतिथि के रूप में राष्ट्रीय सलाहकारी परिषद के सदस्य ज्यां द्रेज उपस्थित थे।