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सीआईएससीई ने शुरू किया 'प्रोजेक्ट शाइन', विद्यार्थियों के अधिगम स्तर का होगा मूल्यांकन

सीआईएससीई ने शुरू किया 'प्रोजेक्ट शाइन', विद्यार्थियों के अधिगम स्तर का होगा मूल्यांकन

संक्षेप:

रांची में सीआईएससीई ने 'प्रोजेक्ट शाइन' की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में सोचने और समस्याओं को हल करने की क्षमता विकसित करना है। कक्षा 3, 6 और 9 के छात्रों का आकलन उनके पिछले और...

Oct 22, 2025 06:48 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रांची
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रांची, वरीय संवाददाता। विद्यार्थियों में सोचने, समझने और समस्याओं को हल करने की क्षमता विकसित करने तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) ने एक नई पहल की है। इसके तहत, बच्चों ने अपनी पिछली कक्षा में क्या पढ़ा है और सिलेबस को कितना समझा है, इसका आकलन किया जाएगा। फिलहाल, यह आकलन परीक्षा कक्षा 3, कक्षा 6 और कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए होगी। यह परीक्षा उनकी पिछली कक्षा के पाठ्यक्रम के साथ-साथ वर्तमान पाठ्यक्रम के आधार पर आयोजित की जाएगी। यह पूरी पहल 'प्रोजेक्ट शाइन' (स्टूडेंट्स हॉलिस्टिक इंसाइट एंड नर्चरिंग इवेल्यूशन) के तहत शुरू की गई है।

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पायलट प्रोजेक्ट के तहत संत जेवियर्स स्कूल, डोरंडा में परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की जा चुकी है। अब दूसरे चरण की परीक्षा नवंबर में होने जा रही है, जिसमें संत थॉमस स्कूल, गोड्डा के विद्यार्थी शामिल होंगे। स्कूल में इसकी तैयारी चल रही है और यह परीक्षा संभवतः 10 से 21 नवंबर के बीच आयोजित होगी। नई शिक्षा नीति का हिस्सा संत जेवियर्स स्कूल के शिक्षक डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि यह पहल नई शिक्षा नीति का एक हिस्सा है, जिसमें बच्चों की क्षमता वृद्धि और सिलेबस की गहरी समझ विकसित करने पर जोर दिया गया है। पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद बोर्ड इसे देशभर के स्कूलों में लागू करेगा। उल्लेखनीय है कि सीबीएसई ने भी इसी तरह की पहल शुरू की थी, और झारखंड सरकार ने भी जैक के माध्यम से पिछले वर्ष बच्चों के सीखने की क्षमता के आकलन के लिए परीक्षा ली थी। ::: प्रोजेक्ट शाइन का मुख्य उद्देश्य ::: समग्र क्षमताओं का विकास: विद्यार्थियों में बौद्धिक, भावनात्मक, नैतिक और रचनात्मक क्षमताओं का विकास करना। अभिभावकों को सहायता: अभिभावकों को अपने बच्चों की शैक्षणिक प्रगति और उनके सीखने की यात्रा को बेहतर ढंग से समझने में सहायता प्रदान करना। समान अवसर और कौशल: आधारित शिक्षा: सभी बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराना और कौशल-आधारित शिक्षा के महत्व को स्थापित करना।