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बाल अधिकार चैंपियनों ने विधानसभा अध्यक्ष व विधायकों के संग मनाया बाल दिवस

हिन्दुस्तान टीम,रांचीNewswrap
Sun, 14 Nov 2021 07:10 PM
बाल अधिकार चैंपियनों ने विधानसभा अध्यक्ष व विधायकों के संग मनाया बाल दिवस

रांची। प्रमुख संवाददाता

बाल दिवस पर रविवार को झारखंड के बच्चों ने विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो और विधायकों के साथ ऑनलाइन परिचर्चा-समावेशी बाल संसद, में भाग लेकर बच्चों से जुड़े मुद्दों को उठाया। कार्यक्रम का आयोजन यूनिसेफ व नाइन इज माइन, संस्था की साझेदारी में झारखंड के गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से किया गया। इस ऑनलाइन बाल संसद में विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा, अमित कुमार मंडल, अमित कुमार यादव व राज सिन्हा ने भी हिस्सा लिया और अपने विचार व्यक्त किए।

यह परिचर्चा बच्चों के महामारी के दौरान के अनुभवों व शिक्षा पर पड़े इसके असर और चुनौतियों के अलावा उन समस्याओं का क्या सार्थक हल निकाला जाए, इस पर केंद्रित था। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण झारखंड विधानसभा टीवी के माध्यम से किया गया। कार्यक्रम के दौरान झारखंड के 500 से अधिक बच्चों ने शिक्षा को लेकर अपनी मांगों का एक चार्टर भी विधानसभा अध्यक्ष, विधायकों व यूनिसेफ झारखंड को प्रस्तुत किया।

विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने कहा कि हर किसी को खुद को व्यक्त करने का अधिकार है और यूएनसीआरसी के अनुच्छेद 13 में यह स्पष्ट कहा गया है कि इसमें बच्चे और युवा भी शामिल हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के इस अधिकार के एक हिस्से में अपने लिए जानकारी खोजने में सक्षम होना भी शामिल है, ताकि इसे आप अपनी इच्छानुसार साझा करने में सक्षम बन सकें। कहा कि इन बच्चों में आत्मविश्वास देखकर बहुत खुशी हो रही है, जो प्रभावी तरीके से अपने अनुभव साझा करने में सक्षम हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों और बच्चों को एक साथ काम करना होगा। साथ ही, स्कूली शिक्षा में विश्वास को बल देना होगा, क्योंकि बच्चे स्कूल के माहौल में सबसे ज्यादा सीखते और विकसित करते हैं। यूनिसेफ झारखंड के प्रमुख प्रशांत दास ने कहा कि बच्चों ने अपनी उन समस्याओं व चिंताओं को हमारे साथ साझा किया है, जिसने उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, जैसे कि स्कूलों का बंद होना, जिसके कारण उनकी पढ़ाई-लिखाई पर व्यापक असर पड़ा है और वे अपना सिलेबस पूरा नहीं कर पा रहे हैं। कोरोना संकट ने उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाला है। ऐसे में बाल दिवस पर बच्चों के लिए इससे अच्छा मंच हो नहीं सकता, जहां वे अपनी बातें नीति-निर्माताओं तक पहुंचा सकें। बच्चों ने शिक्षा को हुए नुकसान की भारपाई के लिए जो सुझाव बताए हैं, उसपर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है- जैसे कि पाठ्यक्रम को पूरा करने हेतु शिक्षकों द्वारा अतिरिक्त कक्षाएं ली जा सकती हैं, सीखने में मदद के लिए डेटा पैक वाले मोबाइल फोन मुहैया कराने की भी आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। अकेले स्कूल सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकते हैं। बच्चे इस प्रक्रिया में अपने माता-पिता, प्रधानाचार्य व समुदाय को शामिल कर सकते हैं। वे पंचायत नेताओं से भी मिल सकते हैं और अपने चार्टर के दो मांगों पर उनसे कार्रवाई का अनुरोध कर सकते हैं। यूनिसेफ झारखंड की संचार अधिकारी आस्था अलंग ने कहा कि महामारी ने बच्चों के जीवन को गहरे तक प्रभावित किया है। इसके कारण बच्चों के सामाजिक संपर्क में तो कमी आई ही है, उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ा है। ऑनलाइन शिक्षा के साथ खुद को जोड़ पाना भी उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन कर उभरा है। बच्चों को अपनी समस्याओं एवं मुद्दों को साझा करने का अवसर देना, उनको आवाज प्रदान करना है।

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