एनआईएमएच का रीजनल एपेक्स इंस्टीट्यूट बनेगा सीआईपी

Feb 01, 2026 07:53 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रांची
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रांची और तेजपुर में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का क्षेत्रीय शीर्ष संस्थानों के रूप में उन्नयन होगा, न्यूरोलॉजी और न्यूरो सर्जरी के साथ जेरिए

एनआईएमएच का रीजनल एपेक्स इंस्टीट्यूट बनेगा सीआईपी

रांची। रंजन रांची के कांके में अवस्थित ‘सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साईकेट्री’ (सीआईपी) को ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ’ का ‘रीजनल एपेक्स इंस्टीट्यूट’ के रूप में उन्नयन किया जाएगा। यहां निमहांस की तरह चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध होगी। केंद्र सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को पेश किए गए आम बजट में इसकी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में मानसिक स्वास्थ्य के लिए कोई राष्ट्रीय संस्थान नहीं है। रांची और तेजपुर में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का क्षेत्रीय शीर्ष संस्थानों के रूप में उन्नयन करेंगे। साथ ही ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज’ (निमहांस)-2 की स्थापना करेंगे।

बता दें कि 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ' (एनआईएमएच) एनआईएच का हिस्सा है, जो अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग का एक घटक है। सीआईपी में 500 बेड का अत्याधुनिक हॉस्पिटल और ओपीडी भवन बनेंगे सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साईकेट्री, रांची के उन्नयन को लेकर निदेशक की ओर से पूर्व में ही केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था। सीआईपी के निदेशक डॉ विजय कुमार चौधरी ने बताया कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ का रीजनल एपेक्स इंस्टीट्यूट बनने के बाद सीआईपी में सेवाओं का न सिर्फ विस्तार होगा, बल्कि विश्व स्तरीय मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके लिए सीआईपी में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त 500 बेड का नया अस्पताल एवं ओपीडी भवन बनेंगे। सीआईपी में न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के साथ साथ न्यूरो सर्जरी डिपार्टमेंट खुलेंगे। बूढ़े-बुजुर्गों की मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए जेरिएट्रिक मेंटल हेल्थ डिपार्टमेंट भी संचालित होगा। जहां उन्हें मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद करने के लिए प्रभावी उपचार विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे। राज्य के 12 जिला अस्पतालों में इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर केंद्र केंद्रीय वित्त मंत्री ने देश के आधे जिला अस्पतालों में इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर केंद्रों की स्थापना करके क्षमताओं को सुदृढ़ करने की भी घोषणा की है। इसमें पूर्वोदय राज्यों और पूर्वोत्तर क्षेत्र पर विशेष ध्यान रहेगा। उन्होंने कहा है कि इसके अभाव में आपातकालीन स्थिति में परिवारों, विशेषकर गरीब और कमजोर आय वर्ग के लोगों को अप्रत्याशित व्यय का सामना करना पड़ता है। झारखंड को भी इससे बड़ा फायदा मिलने की संभावना है। आधे जिला अस्पताल यानी राज्य के 12 जिला अस्पतालों में इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर सेंटर स्थापित किए जाएंगे। निजी और सरकारी क्षेत्रों में एएचपी संस्थानों की स्थापना युवाओं के लिए कुशल कैरियर मार्ग की एक नई शृंखला तैयार करने के उद्देश्य से बजट में संबद्ध स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों (एलायड हेल्थ प्रोफेशनल्स) के लिए मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड करने एवं निजी एवं सरकारी क्षेत्रों में नए संस्थानों की स्थापना की घोषणा की गयी है। इसमें ऑप्टोमेट्री, रेडियोलॉजी, एनेस्थेसिया, ओटी टेक्नोलॉजी, अप्लाइड साइकोलॉजी और व्यवहार संबंधी स्वास्थ्य सहित 10 विधाओं को शामिल किया जाएगा। अगले पांच वर्षों में एक लाख एएचपी जोड़े जाएंगे। बता दें कि एएचपी डॉक्टर या नर्स तो नहीं होते हैं, लेकिन मरीज की देखभाल, निदान, उपचार, पुनर्वास और स्वास्थ्य सुधार में मदद करते हैं। वित्त मंत्री ने वृद्धों की चिकित्सा और संबद्ध देखभाल के लिए योग, मेडिकल और सहायक उपकरणों का प्रचालन जैसे संबद्ध कौशलों का संयोजन करके मानक अनुरूप बहुकौशलयुक्त देखभाल सेवा प्रदाताओं को भी प्रशिक्षित करने के कार्यक्रमों के विकास करने की घोषणा की है। इसके तहत आने वाले वर्षों में 1.5 लाख सेवा प्रदाता तैयार किए जाएंगे। पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों की स्थापना केंद्रीय बजट में भारत को चिकित्सा पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निजी क्षेत्र की साझेदारी में 5 क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों की स्थापना की घोषणा की गई है। ये केंद्र एकीकृत स्वास्थ्य परिसर होंगे, जिसमें चिकित्सा, शैक्षिक और अनुसंधान सुविधाएं होंगी। यहां अत्याधुनिक उपचार, बाद की देखभाल (फॉलोअप), पुनर्वास के लिए आयुष केंद्र और चिकित्सा मूल्य पर्यटन केंद्र होंगे। इसके साथ ही तीन नए आयुर्वेद एम्स भी स्थापित किए जाएंगे। साथ ही आयुष फार्मेसी और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का उन्नयन करने एवं कुशल कार्मिक उपलब्ध कराए जाएंगे। गंभीर मरीजों को मिलेगी सस्ती दवाएं बजट में कैंसर मरीजों को बड़ी राहत दी गयी है। कैंसर की 17 दवाओं पर सीमा शुल्क समाप्त कर दिया गया है। साथ ही सात प्रकार की दुलर्भ बीमारी की दवाएं जब व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयात की जाएंगी तो उसमें सीमाशुल्क नहीं लगेगा। यह निर्णय 02 फरवरी से प्रभावी है।

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