डीएसपीएमयू में मना खोरठा और संथाली गौरव दिवस
रांची में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में खोरठा और संथाली गौरव दिवस मनाया गया। संथाली विभाग के डॉ बिनोद कुमार ने कहा कि संथाली भाषा को भारतीय संविधान में शामिल किया गया। खोरठा विभाग के डॉ बिनोद कुमार ने श्रीनिवास पानुरी के योगदान को याद किया। कार्यक्रम में शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित थे।

रांची, विशेष संवाददाता। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) में सोमवार को खोरठा और संथाली गौरव दिवस मनाया गया। संताली विभाग की ओर से आयोजित संथाली गौरव दिवस में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय के समन्वयक डॉ बिनोद कुमार ने कहा कि संथाली भाषा-भाषियों व पंडित रघुनाथ मुर्मू के अथक प्रयास से 22 दिसंबर को संताली भाषा भारतीय संविधान के 8वीं अनुसूची में शामिल हुई। सहायक प्राध्यापक डॉ डुमनी माई मूर्मू ने संथाली विषय का संबंध किस प्रकार संताल परगना, संताल समुदाय, पंडित रघुनाथ मुर्मू से है इसको विस्तार से बताते हुए कहा कि मातृभाषा न सिर्फ विचार विनिमय का माध्यम है, बल्कि यह हमारी सभ्यता, संस्कृति की पहचान है।
कुरमाली विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ निताई चंद्र महतो ने कहा कि संताली आज पूर्वी भारत की एक ऐसी भाषा है जो सबसे ज्यादा विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती है। वहीं, खोरठा विभाग की ओर से आयोजित खोरठा दिवस कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ बिनोद कुमार ने कहा कि श्रीनिवास पानुरी खोरठा भाषा साहित्य के आधारस्तंभ थे और हैं। इस कारण इसके जन्म दिन 25 दिसंबर को खोरठा जगत में खोरठा दिवस के रूप में मनाया जाता है। खोरठा विभाग के पीएचडी शोधार्थी सुचित कुमार राय ने कहा कि श्रीनिवास पानुरी का जीवन संघर्षपूर्ण रहा और उन्होंने इनसे जूझते हुए खोरठा भाषा को उस मुकाम पर पहुंचाया जहां पर आज हम सभी खड़े हैं। कार्यक्रम में विभागीय शिक्षकों के अलावा विद्यार्थी और शोधार्थी उपस्थित थे।
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