
क्विज, निबंध और भाषण से याद किया मौलाना आजाद का योगदान
रांची में मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती पर अंजुमन इस्लामिया ने कई कार्यक्रमों का आयोजन किया। 100 से अधिक बच्चों ने क्विज, निबंध लेखन और भाषण प्रतियोगिता में भाग लिया। कुरानखानी के बाद सामूहिक दुआ की गई। डॉ. तारिक हुसैन ने मौलाना आजाद के शिक्षा के प्रति योगदान को सराहा।
रांची, प्रमुख संवाददाता। देश के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती पर अंजुमन इस्लामिया की ओर से कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। क्विज, निबंध लेखन और भाषण प्रतियोगिता में 100 से अधिक बच्चों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने मौलाना आजाद की जीवनी और उनके कार्यों को याद किया। सभी प्रतिभागियों को अंजुमन की ओर से मेडल और प्रशस्ति पत्र बाद में वितरित किए जाएंगे। अंजुमन इस्लामिया के महासचिव डॉ. तारिक हुसैन, उपाध्यक्ष मोहम्मद नौशाद, सदस्य मोहम्मद शहजाद बब्लू, शाहिद अख्तर टुकलू, वसीम अकरम, साजिद उमर, लतीफ आलम और मोहम्मद नजीब उपस्थित थे। मौलाना आजाद ने रांची में रखी थी मदरसा की नींव मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती पर, अंजुमन इस्लामिया द्वारा मेन रोड स्थित मदरसा इस्लामिया में कुरानखानी का आयोजन किया गया।

बच्चों ने कुरआन-ए-पाक की तिलावत की, जिसके उपरांत सामूहिक दुआ में देश और राज्य की खुशहाली के लिए प्रार्थना की गई। अंजुमन के महासचिव डॉ. तारिक हुसैन ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद एक दूरदर्शी शिक्षाविद होने के साथ ही एक सशक्त लेखक, पत्रकार और विचारक भी थे। उन्होंने शिक्षा को सबके लिए सुलभ बनाने हेतु अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनका जीवन शिक्षा, समानता और एकता का एक प्रेरणादायक पाठ है। डॉ. तारिक ने बताया कि मौलाना आजाद का मानना था कि शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण की सबसे मजबूत नींव है। जब वे रांची में नजरबंद थे, तब वे जामा मस्जिद में तकरीर दिया करते थे, जिसे गैर-मुस्लिम लोग भी सुनने आया करते थे। उन्होंने शिक्षा के प्रति समाज के पिछड़ेपन को देखते हुए ही रांची में मदरसा इस्लामिया की स्थापना की थी। कार्यक्रम में इबरार अहमद, शाहिद अख्तर टुकलू, वसीम अकरम, कन्वीनर साजिद उमर समेत अन्य उपस्थित थे।

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