निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच ही उचित : हाईकोर्ट

Newswrap हिन्दुस्तान, रांची
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रांची में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर एक आरोपी से पूछताछ के दौरान मारपीट का आरोप लगा है। हाईकोर्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई को सौंपा है। आरोपी संतोष कुमार ने ईडी पर दबाव डालने और मारपीट का आरोप लगाया था, जिसके बाद वह एयरपोर्ट थाना में केस दर्ज करवा दिया।

निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच ही उचित : हाईकोर्ट

रांची, विशेष संवाददाता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रांची जोनल कार्यालय के अधिकारियों पर पूछताछ के दौरान एक आरोपी से मारपीट के आरोप में दर्ज केस की जांच अब सीबीआई करेगी। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोप केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों पर लगे हैं और मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। ऐसे में स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना ही उचित होगा। कोर्ट ने इसे असाधारण परिस्थिति मानते हुए मामला सीबीआई को सौंपने को कहा। कोर्ट ने एयरपोर्ट थाना प्रभारी को मामले से जुड़े सभी दस्तावेज तत्काल सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया। सीबीआई के अधिवक्ता को आदेश की जानकारी सीबीआई निदेशक को देने के लिए भी कहा।

सुनवाई में ईडी ने कोर्ट को बताया कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से जुड़े करीब 23 करोड़ के सरकारी धन के गबन का आरोपी संतोष कुमार 12 जनवरी को बिना किसी समन के स्वयं ईडी कार्यालय पहुंचा था। पूछताछ में वह अचानक उग्र हो गया और पानी का जग उठाकर अपने सिर पर मार लिया। इससे उसे हल्की चोट आई। इसके बाद अधिकारियों ने उसे सदर अस्पताल भेजा।हालांकि बाद में संतोष ने ईडी अधिकारियों पर एयरपोर्ट थाना में केस दर्ज करा दिया। केस दर्ज होने के बाद रांची पुलिस की एक टीम जांच के लिए ईडी दफ्तर गई और वहां दस्तावेजों की छानबीन करने लगी। इसके खिलाफ ईडी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी।वहीं, राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि पूछताछ के दौरान संतोष पर दबाव बनाया गया और उसके साथ मारपीट की गई। इसी आधार पर उसने केस दर्ज कराया था। उसी की जांच के लिए पुलिस ईडी दफ्तर गई थी।मामले में पूर्व की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ईडी के रांची जोनल कार्यालय के दो अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। साथ ही केंद्र सरकार के गृह सचिव को ईडी कार्यालय की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ, बीएसएफ या अन्य अर्धसैनिक बलों की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी कहा था कि यदि ईडी कार्यालय में कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी सीधी जिम्मेदारी रांची के एसएसपी की होगी।कोर्ट ने ईडी कार्यालय परिसर में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि सामान्य परिस्थितियों में प्राथमिकी के शुरुआती चरण में अदालत हस्तक्षेप नहीं करती, लेकिन इस मामले के तथ्यों को देखते हुए अदालत मूक दर्शक नहीं बन सकती।अदालत ने यह भी कहा था कि प्रथम दृष्टया यह ईडी द्वारा की जा रही संवेदनशील जांच को बाधित करने का प्रयास भी हो सकता है। साथ ही अदालत ने उल्लेख किया कि मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम की धारा 67 के तहत यदि ईडी अधिकारी सद्भावना में अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं, तो उन्हें विधिक संरक्षण प्राप्त है।

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