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रांची

बेलवरण के साथ राजधानी उत्सवी माहौल में डूबा, चहल-पहल बढ़ी

हिन्दुस्तान टीम,रांचीPublished By: Newswrap
Mon, 11 Oct 2021 07:50 PM
बेलवरण के साथ  राजधानी उत्सवी माहौल में डूबा, चहल-पहल बढ़ी

कई पूजा पंडाल के पट खुले, कुछ के आज खुलेंगे

कई तरह की पाबंदी के बीच पांच दिनी दुर्गोत्सव आरंभ हुआ

ढ़ोल-नगाड़े व ढ़ाक वादन से माहौल भक्तिमय

रांची। वरीय संवाददाता

शारदीय नवरात्र की षष्ठी पर बेलवरण पूजन के बाद सोमवार को शाम में मां का आविर्भाव हुआ। मां भगवती के आगमन की खुशी में शहर में उत्सव का माहौल शुरू हो गया है। महामारी कोरोना काल में कई तरह की बंदिशों के बीच मां के आगमन की खुशी से पूरा शहर झूमने लगा है। आने वाले चार दिन तक शहर में माहौल दुर्गामय बना रहेगा। पंडालों में मां की अराधना के शास्त्रीय अनुष्ठान शुरू हो गए हैं। आरती और मां को रिझाने वाली भक्ति का उल्लास हर तरफ पसर गया है। भजनों में मां के दरवाजे पर माथा टेकने और हाजिरी लगाने के लिए पूरा शहर व्याकुल है। दुर्गोत्सव प्रारंभ होने से उल्लास, खुशी, भक्ति, आराधना और प्रार्थनाओं का वातावरण हर दिल की धड़कन बन गया है। हर तरफ मां भगवती की कृपा पाने के लिए श्रद्धालुओं में ललक दिखने लगी है। शारदीय नवरात्र में महाषष्ठी पर शहर के अधिसंख्य पूजा पंडाल के पट सोमवार को खुल गए। कुछ पंडाल मंगलवार को खुलेंगे। इसी दिन सुबह में नव पत्रिका प्रवेश के बाद पंडाल में विराजमान देवी भगवती एवं अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा होगी।

पट खुलते ही शुरू हो गए मां के दर्शन

जिन पूजा पंडालों में पट खुल गए हैं वहां शाम के बाद विधिवत पूजा-अर्चना शुरू हो गयी है। भक्त ऐसे पंडालों पर पहुंच कर मां के दर्शन कर रहे हैं। पंडालों के साथ-साथ शहर उत्सवी माहौल में डूब गया है। चहल-पहल के बीच बाजार में लोगों की भीड़ बढ़ गयी है। शहर के मेन रोड, अपर बाजार समेत अन्य व्यापारिक इलाके में बड़ी संख्या में लोगों ने परिवार के सदस्यों के लिए कपड़े और अन्य जरूरी सामान की खरीदारी की। मेन रोड में पूजा को लेकर खरीदारी करने निकले लोगों की भीड़ बढ़ने से दोपहर बाद रूक-रूक कर जाम की स्थिति बनती रही। यही हाल राजधानी के अन्य प्रमुख इलाके की रही। शहर के विभिन्न इलाके में स्थित दुर्गा मंदिर में संध्या आरती में भक्तों ने भागीदारी निभायी।

ढ़ोल-नगाड़े व ढ़ाक वादन से माहौल भक्तिमय

पंडालों में बज रहे ढ़ाक, ढ़ोलक और नगाड़ों से माहौल भक्तिमय बन गया है। पारम्परिक वाद्य यंत्रों के वादन में तल्लीनता से जुटे कलाकारों को देख भक्त मंत्रमुग्ध थे। शाम पांच बजे के बाद किसी न किसी रूप में श्रद्धालु पूजा पंडालों तक पहुंचने लगे थे। पूजा पंडाल के आसपास के मुहल्ले और कॉलोनी में रहने वाले बच्चों, महिलाओं से लेकर बड़ों तक में सभी में देवी दर्शन को लेकर उत्सुकता दिखी। हालांकि राज्य सरकार के गाइड लाइन के मुताबिक पूजा पंडाल में 18 साल से कम आयु के बच्चों को साथ ले जाने पर रोक है। इसके बावजूद बच्चे दूर से ही छोटे आकार के ही लेकिन भव्य बने पूजा पंडाल को निहारते दिखे। आयोजकों की ओर से इस बार सरकार के गाइड लाइन के मुताबिक पूजा का आयोजन किया जा रहा है। इस वजह से पंडाल के आसपास तोरण द्वार नहीं बनाए गए हैं और न ही मनोहारी विद्युत सज्जा की गयी है। इसके बावजूद पंडाल के समीप चटक रंग में रोशनी बिखेरने वाली डिजीटल लाइटें लगायी गयी हैं।

बेलवरण अनुष्ठान के साथ मां भगवती का हुआ आह्वान

षष्ठी तिथि पर सूर्यास्त के समय बेलवरण, जल यापन अनुष्ठान आरंभ हुआ। पूजा पंडालों से गाजे-बाजे के साथ पुरोहित एवं श्रद्धालु समीप के बिल्व वृक्ष तक गए। वैदिक मंत्रों एवं षोड्शोपचार विधि से बेल वृक्ष की पूजा की गयी। पंच देवता पूजा और कई अन्य धार्मिक विधान के बाद पूजा स्थल पर कोला बाऊ की स्थापना की गयी। बिल्व वृक्ष के नीचे देवी के छठे रूप कात्यायनी देवी का आह्वान कर पूजा पंडाल के पट खोलने की परम्परा रही है। पूजा आयोजकों द्वारा पंडालों में मां भगवती समेत अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की स्थापना की गयी है। मंगलवार को सुबह नव पत्रिका प्रवेश, वेदी पूजन, प्राण प्रतिष्ठा, महास्नान, आरती एवं पुष्पांजलि का अनुष्ठान होगा।

फोटो: रूपेश कुमार

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