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रांची

बीएयू: मक्का शोध परियोजना के लिए 58 लाख रुपये का आवंटन

हिन्दुस्तान टीम,रांचीPublished By: Newswrap
Sat, 29 May 2021 09:50 PM
बीएयू: मक्का शोध परियोजना के लिए 58 लाख रुपये का आवंटन

रांची। प्रमुख संवाददाता

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय समन्वित मक्का सुधार परियोजना के तहत हुए शोध और विकास कार्यों के लिए आईसीएआर ने वर्ष 2021-22 के लिए बीएयू को 58.40 लाख रुपये का आवंटन किया। इस वर्ष आवर्ती आकस्मिक निधि के तहत आवंटित राशि को चार लाख रुपये से बढ़ाकर 7.35 लाख रुपये कर दिया गया है।

वहीं, जनजातीय उप योजना के अंतर्गत 10.5 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2005 से चल रही इस शोध परियोजना के अंतर्गत बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की ओर से किए गए शोध कार्यों को आईसीएआर द्वारा उत्कृष्ट बताया गया है।

परियोजना के तहत भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान, लुधियाना की ओर से आवंटित 20-25 समन्वित परीक्षण बीएयू के मक्का वैज्ञानिक प्रत्येक वर्ष सफलतापूर्वक निष्पादित करते हैं। मक्का परियोजना की प्रधान अन्वेषक डॉ मणिगोपा चक्रवर्ती ने बताया कि इस परियोजना में इनब्रेड के विकास के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम के अंतर्गत 4 इनब्रेड को नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज, दिल्ली में रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है। इनका आईसी नंबर भी प्राप्त है। संकर किस्म के विकास के लिए हर साल बड़ी संख्या में इनब्रेड को लगाकर संकरण कार्यक्रम में इनका उपयोग किया जाता है। अब तक बीएयू की ओर से शोध प्रक्षेत्र परीक्षण, क्षेत्रीय परीक्षण और बहुस्थानीय परीक्षण में 1,000 से अधिक संकर प्रजातियों का मूल्यांकन किया गया है।

इस परियोजना के तहत 6 विद्यार्थियों ने पीएचडी और 6 छात्र-छात्राओं ने अपना एमएससी शोध कार्य पूर्ण किया है। कार्यक्रम के तहत वर्ष 2015 में किए गए शोध कार्य को सर्वश्रेष्ठ थीसिस पुरस्कार मिला। अन्य शोध कार्यों को इंटरनेशनल प्लांट न्यूट्रिशन इंस्टीट्यूट का अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार, सीएसआईआर का इंस्पायर फेलोशिप व जापान सरकार से एचओपीई पुरस्कार प्रदान किया गया। फरवरी, 2020 में प्रतिष्ठित शोध पत्रिका 'नेचर', इसकी एनएएएस रेटिंग 10.01 है, में इस परियोजना के शोध कार्य प्रकाशित हुए हैं। इसके अलावा एडवांस्ड वेराइटल ट्रायल-2 के तहत विभिन्न परिपक्वता की संकर किस्मों के साथ-साथ क्यूपीएम (क्वालिटी प्रोटीन मेज), पॉपकॉर्न, स्वीटकॉर्न और बेबीकॉर्न का परीक्षण सफलतापूर्वक किया गया। पिछले 3 वर्षों के दौरान विभिन्न संकर व संकुल किस्मों का 15 क्विंटल से अधिक बीज उत्पादन किया गया और किसानों में वितरित किया गया।

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