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कभी झारखंड के टॉप नक्सली का गढ़ था, नक्सलवाद तो खत्म हुआ लेकिन, मुंह चिढ़ा रहा 'बालू पर तैरता पुल'

बालू पर तैरता पुल, सुनकर थोड़ा अजीब लगेगा, लेकिन यह हकीकत है। यह पुल देखना तो हो तो आपको रांची से सिर्फ 45 किलोमीटर की दूरी पर खूंटी के खसारीबेड़ा, डुंडी, मसीडीह, जोरोको मोसोंगा, इंदिपीड़ी, बारूलता, तलायडीह, रूताडीह, बाड़ेबेड़ा, जोजोहातु गांव को खसारीबेड़ा से जोड़ने वाली सड़क पर आना पड़ेगा। यहां के बेड़ाहातु नदी में गिरा हुआ पुल प्रशासन को मुंह चिढ़ा रहा है। 

कुंदन के सरेंडर के बाद खत्म हुआ नक्सलवाद, फिर भी विकास की किरण नहीं पहुंची
इन गांवों में कभी झारखंड के मोस्ट वांटेड और 15 लाख के इनामी नक्सली कुंदन पहान का ठिकाना होता था। घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण प्रशासन इन क्षेत्रों में काम कराने से बचता था। पिछले साल मई में कुंदन के सरेंडर के बाद भी स्थति नहीं बदली है। नक्सलवाद तो खत्म हो गया लोग गुहार लगाते-लगाते थक गए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 

नहीं पहुंची है बिजली, सड़क की हालत भी पतली
इन गांवों में सड़क के नाम पर सिर्फ पत्थर है जिसपर गाड़ी चलाना मौत के कुएं में चलाने जैसा है। बिजली के लिए सड़क के किनारे पोल गिराए गए हैं, लेकिन बिजली कब तक आएगी किसी को पता नहीं। एक ग्रामीण ने बताया कि छह माह पहले ट्रांसफार्मर आया था, लेकिन उसे लगाने वाला नहीं आया। 

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  • Web Title:At the time Jharkhands top Naxalite was the stronghold Naxalism ended but the teasing bridge on the sand