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रांचीभोज्य सामग्री के साथ-साथ गाड़ी चलाना भी हुआ महंगा, खाने का और गाड़ी से चलाने, दोनों का तेल हुआ महंगा

हिन्दुस्तान टीम,रांचीPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 03:20 AM
भोज्य सामग्री के साथ-साथ गाड़ी चलाना भी हुआ महंगा, खाने का और गाड़ी से चलाने, दोनों का तेल हुआ महंगा

रांची। राजू प्रसाद

कोरोना काल में बढ़ती महंगाई से आमजन बेहाल हैं। रांची के बाजार में खाने के तेल हो या फिर गाड़ियों को चलाने वाला पेट्रोल दोनों की कीमतें जंगल में लगी आग की तरह बढ़ रही हैं। मई माह में पेट्रोल और डीजल की कीमत में भी कई बार बढ़ोत्तरी हो चुकी है। खाद्यान्न एवं पैकेटबंद सामान की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं। गर्मी के मौसम में अंडे की कीमत भी प्रति कैरेट 40 रुपए बढ़ी है। लॉकडाउन में काम नहीं मिलने और जैसे-तैसे जरूरत पूरा करने वाला निम्न-मध्यमवर्ग एवं मध्यमवर्ग परिवार की थाली से अंडा दूर हो रहा है।

तूफान यास के असर से खेतों से सब्जी नहीं टूट रही है। इस कारण राजधानी में सब्जियां भी अचानक से महंगी हो गई हैं। 10 रुपये किलो बिकने वाला टमाटर अचानक से 30-40 रुपये बिकने लगा है। खीरा, गाजर, नेनुआ, करेला, गोभी सभी के भाव अचानक से चढ़ गए हैं।

मई में चार बार बढ़ी खाद्य तेल की कीमत:

रांची में खाद्य तेल में सबसे ज्यादा कीमत सरसों तेल की बढ़ी है। मई माह में सरसों तेल की कीमत चार बार बढ़ी। मई के पहले सप्ताह में सरसों तेल की कीमत 180 रुपये से लेकर दो सौ रुपए तक थी। माह के अंत में इसके मूल्य में थोड़ी कमी आयी है। अभी सरसों तेल 170 से 195 रुपये तक प्रति लीटर मिल रहा है। मूल्य वृद्धि का यह क्रम जनवरी माह से चालू है। खुदरा दुकानदारों के मुताबिक विभिन्न प्रचलित कंपनी के तेल खुदरा बाजार में प्रति लीटर पांच से 25 रुपये अधिक कीमत पर ग्राहकों को मिलते हैं। इससे पूर्व दिसम्बर माह के अंत से अप्रैल माह तक थोक एवं खुदरा बाजार में खाद्य तेल की कीमत में 25 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई थी। थोक कारोबारियों ने बताया कि 31 दिसम्बर को रांची में थोक में पाम आयॅल 110 रुपये प्रति लीटर था। इस समय सोया रिफाइंड तेल 125, सरसों तेल 135 एवं सूरजमुखी का तेल 155 रुपये प्रति लीटर था।

पेट्रोल-डीजल की कीमत में भी वृद्धि:

पेट्रोल और डीजल की कीमत में भी हर दिन कुछ वृद्धि हो रही है। रांची में सोमवार को पेट्रोल 90.84 रुपये एवं पेट्रोल 89.91 रुपये था। 24 मई को पेट्रोल की कीमत 90.23 रुपये एवं डीजल 89.04 रुपये था। चार मई को रांची में पेट्रोल 88.05 रुपये एवं डीजल 85.52 रुपये प्रति लीटर लोगों को मिला। इसके बाद से कीमत में हर दिन बढ़ोत्तरी हो रही है। वर्ष 2021 में 23 मार्च को डीजल 86.12 रुपये और पेट्रोल 88.54 रुपये प्रति लीटर था। दोनों की कीमत में औसतन 15 पैसे तक की बढ़ोत्तरी हो रही है।

खाद्यान्न की कीमतों में भी बढ़ोत्तरी:

बाजार में खाद्यान्न की कीमतों में भी बढ़ोत्तरी हुई है। पिछले तीन माह के अंदर सबसे ज्यादा दाल की कीमतों में बढ़ोत्तरी हुई है। खुदरा बाजार में रहर दाल व काबुली चना की कीमत में 20 से 22 प्रतिशत, चना, उड़द और राजमा की कीमत में दस से 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं चावल, आटा की कीमतें दिसम्बर माह की तुलना में करीब सामान्य हैं। डेढ़ माह पूर्व छह रुपये प्रति किलो मिलने वाला आलू अभी 15 रुपए में बिक रहा है। खाद्यान्न के खुदरा विक्रेता प्रमोद लोहिया ने बताया कि मूंग दाल, सफेद मटर पांच से दस रुपये महंगा हुआ है।

पैकेटबंद सामान भी 10 प्रतिशत तक महंगे:

बाजार में दैनिक जरूरत के पैकेटबंद सामान भी एक माह के अंदर दस प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं। अपर बाजार में पैकेटबंद सामान के थोक विक्रेता सुनील कुमार ने बताया कि अप्रैल माह के अंत से अभी तक साबुन, डिटरजेंट, टूथ पेस्ट, विभिन्न तरह के तेल-क्रीम, ब्रांडेड फिनाइल समेत खाद्य सामग्री की कीमत में वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे और तैयार माल, पेट्रोलियम उत्पाद के मूल्य में बढ़ोत्तरी का असर खुदरा बाजार पर है। विभिन्न कंपनी के प्लांट में माल का उत्पादन भी पूर्व की तरह नहीं हो रहा है। इस कारण से बाजार में जरूरत के सामान की किल्लत है।

कारोबार पर भी असर:

जानकारों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी का ट्रांसपोर्टेशन, टेक्सटाईल्स, केमिकल और एफएमसीसजी समेत सभी तरह के उत्पादन सेक्टर में प्रभाव दिख रहा है। धीरे-धीरे लागत मूल्य बढ़ने से कीमतों में बढ़ोत्तरी हो रही है और अब इसका सीधा असर आमजन पर पड़ रहा है।

अर्थव्यवस्था सिकुड़ेगी, उत्पादन कम होगा:

झारखंड में मिनी लॉक डाउन लगाए जाने से अप्रैल-जून वाली पहली तिमाही में आर्थिक संवृद्धि पर नकारात्मक असर दिखाई दे सकता है। चैंबर अध्यक्ष प्रवीण जैन छाबड़ा व महासचिव राहुल मारू ने कहा कि अगर इस माह के अंत तक हालात सामान्य नहीं होते हैं, तो इसका असर पूरे साल की जीडीपी पर दिख सकता है। नकारात्मक प्रभाव में अर्थव्यवस्था सिकुड़ेगी, उत्पादन कम होगा और उपभोग नीचे आएगा। इसके अलावा आर्थिक नुकसान के कई ऐसे प्रभाव होंगे, जिसे आसानी से किसी भी पैमाने पर मापा नहीं जा सकता।

गृहणियों पर महंगाई की मार:

गृहणियों का कहना है कि महंगाई की वजह से रसोईघर से बहुत सारे सामान अब दूर होते जा रहे हैं। धुर्वा की रंजू सिंह ने बताया कि सबसे ज्यादा परेशानी खाद्य तेल की कीमतों में वृद्धि को लेकर हुई है। हेहल सुंदर नगर की रानी कुमारी ने बताया कि दैनिक जरूरत का हर सामान पिछले तीन-चार माह से लगातार बढ़ रहा है। रातू रोड के बढ़ई मुहल्ला की सुनीता श्रीवास्तव ने बताया कि कोरोना काल में मांस-मछली से अलग लोग अंडा को भोजन में शामिल कर रहे थे, अब इसकी कीमत भी लगातार बढ़ रही है।

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