उद्यमिता, नवाचार और सामाजिक मूल्यों पर केंद्रित रहा आईआईएम रांची प्रबंधन सम्मेलन
रांची में आयोजित 10वें पैन-आईआईएम विश्व प्रबंधन सम्मेलन (डब्ल्यूएमसी)-2025 का समापन हुआ। शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं ने भारत के विकास, नवाचार और सामाजिक परिवर्तन पर चर्चा की। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने सामाजिक बदलाव में आईआईएम संस्थानों की भूमिका को रेखांकित किया। उत्कृष्ट शोध प्रस्तुतियों को पुरस्कृत किया गया।

रांची, विशेष संवाददाता। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), रांची में आयोजित तीन दिवसीय 10वां पैन-आईआईएम विश्व प्रबंधन सम्मेलन (डब्ल्यूएमसी)-2025 शनिवार को संपन्न हुआ। अंतिम दिन देशभर से आए शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और प्रबंधन विशेषज्ञों ने भारत की विकास यात्रा, नवाचार, नेतृत्व में खुशहाली और विकसित भारत के लक्ष्य में आईआईएम संस्थानों की भूमिका पर चर्चा की। सम्मेलन के समापन सत्र में नौ अकादमिक श्रेणियों में उत्कृष्ट शोध प्रस्तुतियों को पुरस्कृत किया गया। समापन समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रबंधन संस्थानों को सिर्फ कॉर्पोरेट नेतृत्व तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के अग्रणी संस्थान के रूप में कार्य करना चाहिए।
उन्होंने चेताया कि भारत भले ही दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय में 130 से नीचे की रैंक चिंता का विषय है। वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब मानव और सामाजिक पूंजी पर मजबूत निवेश हो। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भारत के 700 से अधिक जिलों में सिर्फ 3 प्रतिशत अतिरिक्त विकास हासिल कर राष्ट्रीय जीडीपी में बड़ा उछाल लाया जा सकता है। आर्थिक असमानता और जलवायु जागरूकता को उन्होंने दो प्रमुख प्रबंधन हस्तक्षेप क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 80 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराना भारत की आजीविका चुनौती को स्पष्ट करता है, और जितने भी आईआईएम हैं, उनको इस दिशा में ठोस शोध कर समाधान विकसित करना चाहिए, विशेषकर झारखंड जैसे राज्यों के लिए। आईआईएम, अहमदाबाद के निदेशक प्रो भारत भास्कर ने उद्यमिता और गैर-रैखिक विकास को भारत की भविष्य की अर्थव्यवस्था की कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि भारत को 32 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए- जॉब सीकर्स नहीं, बल्कि जॉब क्रिएटर्स, की आवश्यकता है। उन्होंने एमएसएमई की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की, जो भारत की 45 प्रतिशत निर्यात क्षमता और 30 करोड़ रोजगार का आधार हैं। उन्होंने आईआईएमए वेंचर्स के योगदान का उल्लेख किया, जिसने भारत के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित की है। प्रो राजेंद्र श्रीवास्तव (आईएसबी) ने- सस्टेनेबल बिजनेस इनोवेशन, के विषय पर चर्चा करते हुए और बताया कि 21वीं सदी में मूल्य सृजन का आधार भौतिक संपत्ति नहीं, बल्कि ग्राहक, ब्रांड, आईपी और नवाचार है। उन्होंने कहा कि व्यवसायों को दीर्घकालिक सफलता के लिए लगातार नवाचार और मूल्य पुनर्निर्माण पर ध्यान देना होगा। उत्कृष्ट शोधकर्ताओं को मिला सम्मान समापन सत्र में 10वें पैन-आईआईएम डब्ल्यूएमसी 2025 की सार पुस्तक, का विमोचन भी किया गया। साथ ही, विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट शोधकर्ताओं को सम्मानित किया गया। बेस्ट ऑफलाइन पेपर प्रस्तुति के लिए- सिद्धार्थ सिन्हा, बेस्ट ऑनलाइन पेपर प्रस्तुति (ओवरऑल) के लिए- प्रप्ति अग्रवाल और पोस्टर प्रस्तुति (ओवरऑल) के लिए विक्रांत सिंह, को सम्मानित किया गया। विभिन्न शोध डोमेन के विजेता- वरुण शर्मा (अर्थशास्त्र), गोखिलवाणी आर, डॉ लक्ष्मी सुब्रमणि और अमित त्रिपाठी (वित्त एवं लेखा), सूर्या जयी डे (आईएसबीए), सिद्धार्थ सिन्हा (उत्तरदायी व्यवसाय), संस्कृति देशमुख (मार्केटिंग), प्रप्ति अग्रवाल (ओबीएचआर), अर्नब अधिकारी (क्वांट एवं ऑपरेशंस), संदीप यादव (रणनीति एवं उद्यमिता) और अपूर्वा (अंतरविषयक अध्ययन), रहे। सम्मेलन में संयोजक प्रो मनीष बंसल, प्रो शुभ्रो सरकार और प्रो कृष्ण कुमार डडसेना का योगदान रहा। समापन में सत्र में आईआईएम शिलांग की निदेशक (कार्यकारी) प्रो नलिनीप्रवा त्रिपाठी ने घोषणा की कि 11वां पैन-आईआईएम विश्व प्रबंधन सम्मेलन 2026 का आयोजन आईआईएम शिलांग की ओर से दिसंबर 2026 में किया जाएगा।
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