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विधि अधिकारियों की नियुक्ति पर फैसला सुरक्षित

जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत जिलों में विधि अधिकारियों की नियुक्ति को चुनौती देनेवाली याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। नियुक्ति को आलोक वर्मन एवं अन्य ने चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि जेजे एक्ट के तहत हर जिले में समेकित बाल संरक्षण योजना के तहत 2013 में जिलों में प्रोविजनल सह लीगल ऑफिसर की नियुक्ति की गई थी। 2016 में सरकार ने नियम बनाकर विज्ञापन निकाल कर भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सुनवाई के दौरान प्रार्थी के अधिवक्ता ने कहा कि वे लोग संविदा पर काम कर रहे हैं और सरकार द्वारा नियम बनाकर दोबारा संविदा पर नियुक्ति करना करना गलत है। इसको लेकर प्रार्थी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया गया। सरकार की ओर से अधिवक्ता प्रशांत कुमार सिंह ने कोर्ट के बताया कि संविदा पर इनकी नियुक्ति निर्धारित अवधि के लिए की गई थी। सरकार ने जेजे एक्ट के तहत 2016 नियुक्त नियम बनाया। इसमें आरक्षण व रोस्टर का भी ध्यान रखा गया है। इसलिए प्रार्थी का आरोप सही नहीं है, क्योंकि उनकी सेवा अवधि समाप्त हो रही है। वहीं, इन लोगों ने 2016 की नियुक्ति प्रक्रिया में भाग लिया है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद जस्टिस एसएन पाठक की अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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