झारखंड में कुपोषण के खात्मे को शिशु शक्ति योजना होगी लागू, क्या-क्या खास?
झारखंड में कुपोषण के खिलाफ चल रही जंग को एक कदम और आगे बढ़ाने की तैयारी जोरों पर है। सरकार राज्य में कुपोषण के खात्मे के लिए शिशु शक्ति योजना लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए डिजिटल ऐप, मॉड्यूल और रजिस्टर तैयार किए गए हैं।

झारखंड में कुपोषण की पहचान से लेकर अति गंभीर कुपोषित बच्चों के पोषाहार उपचार तक के लिए राज्य सरकार ने कार्ययोजना बनाई है। चक्रधरपुर प्रखंड में सफलतापूर्वक संचालित पायलट प्रोजेक्ट के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने शिशु शक्ति ऑगमेंटेड टेक होम राशन (टीएचआर) योजना को पूरे राज्य में लागू करने का निर्णय लिया है। यह योजना अति गंभीर कुपोषित बच्चों के पोषण उपचार के लिए तैयार की गई एक विशेष रेसिपी आधारित कार्यक्रम है।
इसके अलावा जन्म से 6 माह तक के छोटे शिशुओं में कुपोषण की पहचान और प्रबंधन के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत आंगनबाड़ी सेविका और सहिया द्वारा संयुक्त गृह भ्रमण कर छोटे बच्चों में कुपोषण के खतरे का आकलन किया जाएगा और उनके परिजनों को प्रबंधन के लिए उचित परामर्श दिया जाएगा। कार्यक्रम के बेहतर क्रियान्वयन के लिए डिजिटल ऐप, मॉड्यूल एवं रजिस्टर भी तैयार किए गए हैं। बीते 26 मई को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक में उपरोक्त नई पहलों को बारीकी से देखा था।
क्या है शिशु शक्ति योजना?
शिशु शक्ति ऑगमेंटेड टीएचआर योजना अति गंभीर कुपोषित बच्चों के लिए विशेष रूप से तैयार एक पोषाहार कार्यक्रम है। सामान्य बच्चों की तुलना में अति गंभीर कुपोषित बच्चों को बेहतर रिकवरी के लिए अधिक ऊर्जा, प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए एनएफएसए, सीएमएएम और एमडब्ल्यूसीडी के दिशा-निर्देशों के अनुसार शिशु शक्ति की विशेष रेसिपी तैयार की गई है। इस योजना में कुल नौ प्रकार की स्थानीय खाद्य सामग्रियां यथा-मूंगफली, सोयाबीन तेल, दूध पाउडर, चना, चीनी, गेहूं, सोया, रागी और विटामिन एवं मिनरल को शामिल किया गया है। शिशु शक्ति रेसिपी की विशेष बात यह है कि चीनी की मात्रा को घटाकर कुल ऊर्जा का मात्रक 8 % रखा गया है। जबकि वर्तमान में दिए जा रहे टीएचआर में चीनी की मात्रा 22 प्रतिशत तक होती है। यह बदलाव बच्चों के स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
झारखंड में कुपोषण की गंभीर स्थिति
बता दें कि समर योजना के तहत अति गंभीर कुपोषित बच्चों के पोषानात्मक उपचार के लिए शिशु शक्ति की शुरुआत 18 जनवरी 2025 को हुई थी। पहले चरण में योजना का पायलट क्रियान्वयन चक्रधरपुर प्रखंड में 23 जनवरी से 4 मई 2025 तक किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक माह, चार महीने तक समर/सीएमएएम में शामिल सभी अति गंभीर कुपोषित बच्चों को यह विशेष पोषाहार उपलब्ध कराया गया। चक्रधरपुर प्रखंड में क्रियान्वित शिशु शक्ति में 78% तक रिकवरी पायी गई। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता ने इसे पूरे झारखंड में लागू करने का निर्णय लिया है।
22 प्रतिशत पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मौत का प्रमुख कारण कुपोषण। झारखंड में 68 प्रतिशत बच्चे (करीब 10.6 लाख) मध्यम गंभीर कुपोषण से पीड़ित हैं। 09 प्रतिशत (करीब 4.2 लाख) बच्चे अति गंभीर कुपोषण की चपेट में हैं।


