
रांची में 100 ग्राम गांजा का केस चला पांच साल, सजा सिर्फ 30 दिन
रांची की विशेष अदालत ने पांच साल तक चले 100 ग्राम गांजा तस्करी के एक एनडीपीएस मामले में आरोपी बिमल भगत को दोषी ठहराया, लेकिन 30 दिन की न्यायिक हिरासत की अवधि को ही पर्याप्त सजा मानकर रिहा करने का आदेश दिया।
रांची के नगड़ी थाना क्षेत्र के करमटोली निवासी बिमल भगत के पास से जब्त 100 ग्राम गांजा का मुकदमा पांच साल तक चला। एनडीपीएस मामले के विशेष न्यायाधीश ओंकार नाथ चौधरी की अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उसे पहले से काटी गई न्यायिक हिरासत की अवधि (30 दिन) को ही सजा मानकर रिहा करने का आदेश दिया। गौरतलब हो कि गिरफ्तारी के बाद युवक को जेल भेजा गया था, जिसके 30 दिन बाद जमानत मिली थी।
अधिवक्ता ने कहा कि सुनवाई के दौरान ही वह दोष स्वीकार लेता तो समय और पैसे दोनों की बचत होती। हाल में ही इसी तरह के कई मुकदमों में आरोपी ने दोष स्वीकार कर लंबे समय तक कोर्ट का चक्कर लगाने से बचा है, जो बिमल नहीं कर पाया। बिमल भगत घटना के समय लगभग 28 वर्ष का था और 100 ग्राम गांजा (कैनाबिस सैटिवा के फ्लावरी और फ्रूटिंग टॉप्स) के अवैध कब्जे में पाया गया था।
मामला क्या?
घटना 17 दिसंबर 2020 की है, जब नागरी थाना क्षेत्र के कटहल मोड़ स्थित बिमल पान दुकान में गांजा व भांग बिक्री की सूचना पुलिस को मिली थी। सूचना पर पुलिस टीम ने छापेमारी की और आरोपी की दुकान से 20 पुड़िया गांजा बरामद किया, जिनका वजन लगभग 100 ग्राम था। दुकान से जब्ती सूची तैयार की गई, जिसे स्वतंत्र गवाहों के समक्ष पूरा किया गया। एफएसएल रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि बरामद सामग्री गांजा ही है। गिरफ्तार युवक को जेल भेज दिया गया था, जहां 30 दिन जेल काटने के बाद जमानत मिली थी।
अभियुक्त का पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि वह बहुत कम मात्रा की जब्ती है और अभियुक्त का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास भी नहीं मिला। अभियुक्त 19 दिसंबर 2020 से 19 जनवरी 2021 तक न्यायिक हिरासत में रहा। अदालत ने माना कि यह अवधि उसके लिए “पर्याप्त दंड” है और उसे सुधार का अवसर मिलना चाहिए। इस आधार पर न्यायालय ने अधिकतम सजा देने से इनकार करते हुए उसे ‘अवधि-पूर्व सजा’ प्रदान की। मामले में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से छह पुलिस गवाहों को प्रस्तुत किया गया था।





