Ramgarh News: पीवीयूएनएल के खिलाफ फूटा विस्थापितों का गुस्सा, ऐश माउंट का निर्माण ठप किया
Ramgarh News: भुरकुंडा के चार गांवों के विस्थापित-प्रभावित ग्रामीणों ने पीवीयूएनएल प्रबंधन पर झूठे आश्वासन और वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए छाई डैम पर ऐश माउंट का निर्माण कार्य रोक दिया। ग्रामीणों ने स्थायी रोजगार, उचित मुआवजा और पुनर्वास की मांग की है। सांसद और विधायक से हस्तक्षेप की अपील की गई है।

Ramgarh News: भुरकुंडा, निज प्रतिनिधि। पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) प्रबंधन पर झूठे आश्वासन और वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए प्रभावित चार गांवों के विस्थापित-प्रभावित ग्रामीणों ने बुधवार को बलकुदरा स्थित छाई डैम पर बन रहे ऐश माउंट का निर्माण कार्य बंद करा दिया। बलकूदरा, जयनगर, रसदा और गेगदा गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत कार्यस्थल पहुंचकर निर्माण कार्य रोक दिया। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक उनकी जायज मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक ऐश माउंट का निर्माण कार्य अनिश्चितकाल तक ठप रहेगा। ग्रामीणों का आरोप है कि पीवीयूएनएल प्रबंधन लगातार उन्हें आश्वासन देकर आंदोलन स्थगित कराता रहा, लेकिन अब तक किसी भी मांग पर अमल नहीं किया गया。
ग्रामीणों की मुख्य मांगें
इससे आक्रोशित होकर उन्हें दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में स्थानीय बेरोजगारों को 60 वर्ष की आयु तक स्थायी रोजगार व नियुक्ति पत्र देना, छाई डैम से प्रभावित रैयतों की धान फसल के नुकसान का उचित मुआवजा देना, डूब क्षेत्र में रहने वाले परिवारों के लिए स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था करना और रामगढ़ उपायुक्त के निर्देशानुसार पीवीयूएनएल की विस्थापित नीति में व्याप्त त्रुटियों को दूर कर उसमें आवश्यक संशोधन करना शामिल है। अनिश्चितकालनी आंदोलन में बलकुदरा के मुखिया विजय मुंडा, बिजेंद्र मुंडा, लालू महतो, पंचम साव, हरि सिंह, आनंद कुमार, शंकर प्रजापति, सचिन कुमार, विजय ठाकुर, विकास कुमार, अंकित कुमार, कपिल कुमार, चीकू कुमार, अमित कुमार, नंदू कुमार, राहुल कुमार आदि विस्थापित-प्रभावित ग्रामीण डटे हैं।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
ग्रामीणों ने पूर्व में 10 जून 2026 से कार्यबंदी की घोषणा की थी। इससे एक दिन पूर्व 9 जून को पीवीयूएनएल प्रबंधन ने तीनों पंचायतों के मुखिया व ग्रामीणों के साथ आपात बैठक कर डेढ़ माह के भीतर सभी प्रमुख मांगों के समाधान का लिखित एवं मौखिक आश्वासन दिया था। प्रबंधन के भरोसे पर ग्रामीणों ने उस समय आंदोलन स्थगित कर दिया था। लेकिन दो महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने बुधवार से दोबारा निर्माण कार्य बंद करा दिया।
राजनीतिक हस्तक्षेप की मांग
आंदोलित ग्रामीणों ने सांसद मनीष जायसवाल और विधायक रोशन लाल चौधरी से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि छाई डैम एवं ऐश माउंट निर्माण से जुड़े सहमति पत्र पर दोनों जनप्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं। ऐसे में विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा करते हुए सहमति पत्र की शर्तों का पीवीयूएनएल प्रबंधन से सख्ती से पालन कराना उनकी जिम्मेदारी है।


