
कोयलांचल में तिलकुट की सौंधी खुशबू घोल रही है मिठास
बिनोद सिंह, केदला। केदला में मकर संक्रांति के त्योहार से पहले तिलकुट की दुकानों पर भीड़ बढ़ने लगी है। तिलकुट की खास खुशबू और स्वास्थ्य लाभ के कारण लोग इसे पसंद कर रहे हैं। गुड़ से बने तिलकुट की सबसे अधिक मांग है। तिल खाने से शरीर को गर्मी मिलती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।
बिनोद सिंह, केदला। केदला कोयलांचल के ठंडी हवाओं में अब तिलकुट की सौंधी खुशबू का मिठास घुलने लगी है। जगह-जगह तिलकुट की दुकानें सजने लगी हैं। मकर संक्रांति के त्योहार में भले ही अभी एक महीने का समय बचा है। लेकिन दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ अभी से ही उमड़ने लगी है। तिल की विशेष खुशबू लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। दुकानों में तिल से बने विभिन्न प्रकार के पारंपरिक खाद्य पदार्थ भी सज गए हैं। बाजार में सेहत को ध्यान में रखते हुए गुड़ से बने तिलकुट की मांग सबसे अधिक की जा रही है। वहीं काले तिल के लड्डू की डिमांड भी हो रही है।
लोग स्वाद के साथ सेहत का पूरा ख्याल रख रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि ठंडा के दिनों में तिल खाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। साथ ही तिल त्वचा व बालों को भी मजबूत बनाता है। ठंड के दिनों में शरीर को गर्म रखने में भी तिल मददगार होता है। इसमें जिंक, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा अधिक होने के कारण ये रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। जिससे सर्दी-खांसी होने से बचाव होता है। हाउसिंग मोड़ के तिलकुट व्यापारी दीपक कुमार गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष तिल की कीमत से लेकर मजदूरी तक के दाम में बढ़ोतरी हुई है। जिसके कारण गुड़ तिलकुट 260-300 प्रति किलो, चीनी तिलकुट 220-260 और खोवा तिलकुट 350-400 रुपए किलो और काले तिल का लड्डू 250 प्रति किलो बिक रहा है। प्रति दिन डेढ़ क्विंटल तिलकुट यहां बनता है। जो केदला, घाटो, चरही, मांडू, कुजू, आराकांटा, चैनपुर, बड़गांव और ललपनिया जाता है। तिलकुट बनाने का काम गया से आए आठ कारीगर कर रहे हैं।

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