मार्च माह में ही शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र की जलापूर्ति ठप

Mar 16, 2026 01:58 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रामगढ़
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- सुखने लगे हैं डैम और तालाब लगातार सिकुड़ं रही नदियां झारखंड, रामगढ़, गोला झारखंड, रामगढ़, गोला झारखंड, रामगढ़, गोला

मार्च माह में ही शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र की जलापूर्ति ठप

रामगढ़/गोला, हिन्दुस्तान टीम। गर्मी के दस्तक से मार्च माह में ही जलापूर्ति व्यवस्था शहर से लेकर ग्रामीण तक चौपट होने लगी है। डैम और तालाब सुखने लगे हैं। साथ ही लगातार नदियों के सिकुड़ने का क्रम जारी है। शहर की प्रमुख नद दामोदर में आम दिनों कई लेयर में पानी का बहाव होता है। वर्तमान समय में केवल सिंगर लेयर से पानी का बहाव हो रहा है। साथ ही शहर की सेवटा, मरार, नईसराय की तालाब सुखने की कगार पर है। वहीं बिजुलिया, धंधार पोखर, थाना चौक, झंडा चौक आदि तालाब का जलस्तर काफी कम हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें तो गोला, पतरातू, मांडू, गिद्दी, दुलमी, चितरपुर आदि की स्थिति भी कमोबेश यही है।

खास कर गोला प्रखंड क्षेत्र के अधिकतर प्राकृतिक जलस्रोत, नदी-नाला व तालाबों का जलस्तर बड़ी तेजी से सुखने लगा है। वहीं उपरी भाग में बने लगभग तालाब सूख चुके हैं। नदी-नालों में पानी का बहाव थम गया है। प्रखंड क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक गांव ऐसे हैं, जो डार्क जोन के रुप में चिन्हित है। उन जगहों में निवास करने वाले ग्रामीणों को अभी से ही पानी की चिंता सताने लगी है। साड़म पंचायत में पहाड़ और जंगलों के बीच बसे जाराबंदा, काड़ामारा, पत्थलगढ़ा, मसरीडीह, माचाटांड़, जयंतिबेड़ा आदि गांव के ढाई सौ से अधिक परिवार पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की उदासीनता से जल त्रासदी झेल रहे हैं। जाराबांदा के ग्रामीण डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित चुआं से पेयजल लाने के लिए मजबूर हैं। नहाने के लिए पांच किमी दूर बने एक तालाब सहारा बने हैं। इस गांव में पेयजल के लिए उचित व्यवस्था नहीं हुई है। चापाकल और उसमें लगे सोलर जल मीनार खराब है। पेयजल के लिए महिलाओं को घंटों लाइन लगानी पड़ती है। कुआं की स्थिति भी खराब है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हमें पेयजल समस्या से जूझना पड़ रहा है। पेयजल लेने के लिए डेढ़ किलोमीटर दूर और नहाने के लिए पांच किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। पंचायत की मुखिया किरण देवी ने कहा कि डार्क जोन वाले जगहों में डीप बोरिंग के लिए प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस बार भी पिछले साल की भांति गर्मी पड़ी तो पानी की किल्लत निश्चित तौर भयावह रुप लेगा। प्रखंड में कुछ ही जगहों में 100 से 150 फीट की गहराई में पानी मिल जाता है। अधिकतर जगहों में 400 से एक हजार फीट की गहराई में ही पानी मिलता है।- चेकडैम के नाम करोड़ों खर्च, फायदा सिफरगोला प्रखंड क्षेत्र के सभी नदी नालों में भू जलस्तर की स्थिति में सुधार लाने के लिए करोड़ों खर्च करके सैकड़ों जलमिनार बनाए गए हैं। लेकिन एक भी जलमिनार कारगर साबित नहीं हुआ है। ठेकेदारी को ध्यान में रखकर लगभग चेकडैम बनाए गए हैं। जिसके कारण चेकडैमों में पानी ठहराव तो दूर लगभग चेकडैम बनने के साथ बह गए। कुछ बचे भी हैं तो उसमें पानी का ठहराव नहीं मिलेगा। संबंधित अधिकारियों की उदासीनता के कारण यह योजना पूरी तरह से विफल साबित हुआ है। वहीं पानी का अनावश्यक दोहन के कारण कुछ क्षेत्रों में पानी की समस्या देखने को मिल रही है।- तेजी से सूखने लगा है तालाबों का पानीगोला प्रखंड क्षेत्र के लगभग तालाबों का पानी गर्मी की आहट मात्र से ही सुखने लगे हैं। जल संरक्षण के लिए तालाब काफी मददगार साबित होते हैं। उपरी भाग में बने कई तालाब में अभी से ही तालाब सुख चुके हैं। गोला शहर में कालीनाथ तालाब, हरिजन मोहल्ला स्थित तालाब व ग्रामीण क्षेत्र के दर्जनों तालाबों का पानी तेजी से सूख रहा है। वहीं खेती के लिए इस्तेमाल किए जाने पर कई तालाब सुख चुके हैं। कई किसानों ने बताया कि अधिकतर ग्रामीण कृषि के लिए तालाब पर निर्भर हैं, लेकिन तालाब का पानी अभी से सूखने से फसलों की सिंचाई में काफी समस्या उत्पन्न होने लगी है।- गोला में नदियों का जलस्तर बदतरगोला प्रखंड क्षेत्र में भैरवी नदी, गोमती नदी, पटासुर नदी, धोरधोरिया नदी, अम्बागाढ़ा नदी आदि प्रमुख नदियां है। वहीं दामोदर और स्वर्णरेखा नदी गोला के सीमा से होकर गुजरी है। प्रखंड में जितनी भी नदियां बहती है, सभी का जलस्तर बड़ी तेजी से सूख रहा है। पिछले साल की बारिश की कमी का असर इन नदियों पर स्पष्ट देखा जा सकता है। गोमती व पटासूर नदी शहर का लाइफ जाइन माना जाता है, जिसका पानी लगातार सूख रहा है। अब तो नदी का बहाव खत्म हो गया है। जगह-जगह नदी के गड्ढे में पानी जमा मिलता है। लोग चिंतित है कि अभी यह हाल है तो गर्मी में किया हाल होगा।प्रतिक्रियागर्मी के दिनों में आमलोगों की परेशानी बढ़ी है। जिला प्रशासन को विशेष ध्यान देने की जरुरत है। ताकि सभी को नियमित शुद्ध पेयजल मिल सके। समय रहते कारगर कदम उठाना सबसे महत्वपूर्ण है।- मनोज महतोगर्मी के दिनों में पेयजलापूर्ति समस्या को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन को जानकारी दी गई है। लेकिन अब तक पहल नहीं हुआ है। स्थिति कंट्रोल से बाहर होने के पहले ठोस पहल होना चाहिए। ताकि आमलोगों को नियमित पेयजलापूर्ति हो सके।- रेखा सोरेन, जिला परिषद सदस्यगर्मी के दिनों में पानी सबसे महत्वपूर्ण वस्तू है। समय रहते इसकी व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए। इसके लिए जलस्त्रोतों में सुधार करना जरुरी है। ताकि गिरते जलस्तर पर अंकुश लग सके। लोगों को दूर से पानी लाना नहीं पड़े।- अशोक महतोभू-गर्भ जलस्तर पर सुधार के लिए ठोस पहल की जरुरत है। इसे लेकर सरकार को वाटर हार्बेस्टिंग जैसी महत्वपूर्ण योजना पर फोकस करना चाहिए। शहर का पानी शहर में गांव का पानी गांव में अभियान चलाने की जरुरत है।- अमित महतोफोटो गोला 11 सुखने के कगार पर गोला का प्रसिद्ध कालीनाथ तालाबफोटो गोला 12 मनोज महतोफोटो गोला 13 रेखा सोरेनफोटो गोला 14 अशोक महतोफोटो गोला 15 अमित कुमार महतो

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