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3 दिसंबर, 2020|4:22|IST

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नवरात्रि के दिन लोग मां दुर्गा की पूजा कर रहे थे और रामगढ़ की दो बेटियां पिता की अर्थी को कंधा दे रही थीं

नवरात्रि के दिन लोग मां दुर्गा की पूजा कर रहे थे और रामगढ़ की दो बेटियां पिता की अर्थी को कंधा दे रही थीं

1 / 2भारतीय संस्कृति के अनुसार घर पर किसी की मृत्यु होने पर उसकी अर्थी को पुरुष ही कंधा देते हैं। नवरात्रि के दिन समाज का यह मिथक टूटा, रामगढ़ के दुलमी प्रखंड की दो बेटियों ने पिता के निधन पर उनकी अर्थी...

नवरात्रि के दिन लोग मां दुर्गा की पूजा कर रहे थे और रामगढ़ की दो बेटियां पिता की अर्थी को कंधा दे रही थीं

2 / 2भारतीय संस्कृति के अनुसार घर पर किसी की मृत्यु होने पर उसकी अर्थी को पुरुष ही कंधा देते हैं। नवरात्रि के दिन समाज का यह मिथक टूटा, रामगढ़ के दुलमी प्रखंड की दो बेटियों ने पिता के निधन पर उनकी अर्थी...

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भारतीय संस्कृति के अनुसार घर पर किसी की मृत्यु होने पर उसकी अर्थी को पुरुष ही कंधा देते हैं। नवरात्रि के दिन समाज का यह मिथक टूटा, रामगढ़ के दुलमी प्रखंड की दो बेटियों ने पिता के निधन पर उनकी अर्थी दिया।

दुलमी प्रखंड होन्हे गांव निवासी नेमचंद महली (60 वर्ष) का निधन होने पर उनकी दोनों बेटियों ने अर्थी को कंधा दिया और श्मशान घाट में पार्थिव शरीर को मुखाग्नि भी दी। वहां मौजूद लोगों की आंखें यह देखकर भर आईं। नेमचंद महली काफी समय से लीवर कैंसर से पीड़ित थे।

सामाजिक बेड़ियों को समाज ने ही तोड़ा :

पिता के निधन के बाद उसकी दो बेटियां शीला कुमारी व अंजनी कुमारी ने समाज और परिवारजनों के सामने पिता को कंधा देने व मुखाग्नि देने की बात रखी, समाज के लोगों ने दोनों बेटियों से कंधा देने व मुखाग्नि देने की शुरुआत कराई। एक ओर लोग मां दुर्गा के त्योहार के जश्न में डूबे थे, उसी दिन दो बहनों को अपने पिता के पार्थिव शरीर को कंधा देना पड़ा। दोनों बेटियों को पिता के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट तक ले जाने और अन्य सहयोग में सामाज के लोग भी उसके साथ थे। उन्होंने हर संभव मदद की और आगे भी मदद करने का भरोसा दिलाया।

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  • Web Title:On the day of Navratri people were worshiping mother Durga and two daughters of Ramgarh were shouldering the father 39 s bier