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26 नवंबर, 2020|12:45|IST

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. कोयलांचल से दूर हो रहा केंद्रीय विद्यालय भुरकुंडा

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कोयलांचल में लंबे अंतराल तक शिक्षा का अलख जगाने वाले केंद्रीय विद्यालय भुरकुंडा को अब उसके स्वर्णिम इतिहास और माटी से दूर बरकाकाना ले जाया जा रहा है, वो भी हमेशा-हमेशा के लिए। रामगढ़ जिला प्रशासन केंद्रीय विद्यालय संगठन को स्कूल भवन के लिए बरकाकाना के मसमोहना टांड़ में 5 एकड़ जमीन उपलब्ध करवा रही है। यह भुरकुंडा कोयलांचल के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बात है। केंद्रीय विद्यालय भुरकुंडा के अस्तित्व के लिए लंबी लड़ाई लड़ने वाले अभिभावक प्रशासन के इस निर्णय से आहत हैं। अफसोस इस बात का है कि केवि भुरकुंडा को भुरकुंडा में ही जगह नहीं मिली, जबकि कई एकड़ सरकारी जमीन या तो बेकार पड़ी है या फिर उन पर किसी दंबग के कब्जे का परचम लहरा रहा है। यदि प्रशासन ने चाहा होता तो भुरकुंडा ना सही, पड़ोसी थाना क्षेत्र भदानीनगर में भी विद्यालय के लिए जमीन तलाश सकता था। लेकिन हाई कोर्ट के निर्देश को भी प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया। दो साल की बजाय 10 साल में स्कूल के लिए जमीन तलाशी गई। इससे साफ जाहिर होता है कि स्कूल कहां खुलना चाहिए, इस पर होमवर्क करने की बजाय प्रशासन ने यथाशीघ्र जमीन तलाश कर संगठन को सौंपने में जुट गई। यही वजह है कि बरकाकाना के मसमोहना में मिली 5 एकड़ जमीन को फाइनल कर दिया गया। -- प्रस्तावित जमीन से 3 किमी पर है दूसरा केंद्रीय विद्यालय--बरकाकाना का मसमोहना टांड़, जहां रामगढ़ जिला प्रशासन ने केंद्रीय विद्यालय भुरकुंडा के लिए जमीन ढूंढ़ी है, उससे महज तीन किलोमीटर के फासले पर केंद्रीय विद्यालय बरकाकाना है। वहीं, करीब एक किलोमीटर के फासले पर एनटीएस डीएवी बरकाकाना है। यही नहीं, पास में ही कस्तूरबा गांधी आवासीय हाई स्कूल भी है। ऐसे में कोयलांचल की धरोहर केंद्रीय विद्यालय भुरकुंडा को भी वहां स्थापित करने की योजना साफ जाहिर करता है कि प्रशासन ने सारे बिंदुओं पर विचार किए बगैर यह निर्णय लिया है, जो तर्कसंगत भी नहीं है।-- कम फीस व अच्छी शिक्षा के लिए प्रसिद्ध था केवि भुरकुंडा--एक वक्त था जब केंद्रीय विद्यालय भुरकुंडा में दाखिला पाने वाले खुद को खुशकिस्मत समझते थे। कम फीस और गुणवत्तापर्ण शिक्षा के लिए यह विद्यालय खूब प्रसिद्ध था। लेकिन वक्त के साथ स्कूल का भवन जर्जर होता चला गया और अंतत: सीसीएल प्रबंधन की बेरूखी के कारण स्कूल बंद हो गया। इसके बाद अभिभावकों के अथक प्रयास से स्कूल खुला और कुछ साल भुरकुंडा रिवर साईड के बीटीटीआई में संचालित होने के बाद घुटूवा जीएम ऑफिस में शिफ्ट हो गया। लेकिन संघर्ष करने वालों को आस थी कि एक दिन स्कूल वापस भुरकुंडा आएगा और यहां के बच्चों को केंद्रीय विद्यालय में पढ़ने का गौरव हांसिल होगा।

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  • Web Title: Kendriya Vidyalaya Bhurkunda is getting away from Kolanchal