ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News झारखंड रामगढ़बेबस परिजन नहीं ला पाए रविंद्र का शव, कोयागुडेम में हुई अंत्येष्टि

बेबस परिजन नहीं ला पाए रविंद्र का शव, कोयागुडेम में हुई अंत्येष्टि

अपनी माटी से दूर काल की गाल में समाए युवक रविंद्र गंझू का शव आखिरकार भुरकुंडा नहीं आ पाया। इसे परिजनों की बेबसी कहें या फिर सरकार की उदासीनता,...

बेबस परिजन नहीं ला पाए रविंद्र का शव, कोयागुडेम में हुई अंत्येष्टि
हिन्दुस्तान टीम,रामगढ़Thu, 07 Dec 2023 02:45 AM
ऐप पर पढ़ें

भुरकुंडा, निज प्रतिनिधि। अपनी माटी से दूर काल की गाल में समाए युवक रविंद्र गंझू का शव आखिरकार भुरकुंडा नहीं आ पाया। इसे परिजनों की बेबसी कहें या फिर सरकार की उदासीनता, रविंद्र को मिटने के लिए अपनी माटी नसीब नहीं हुई। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद आंध्रप्रदेश एलुरु जिला के कोयागुडम शमशान में उसे फूंक दिया गया। रविंद्र के पार्थिव शरीर के लिए ये खास बात थी कि अंजान प्रदेश के अंजान शहर में उसके हश्र पर रोने वाला उसका बड़ा भाई बिशु गंझू, बहन शोभा देवी और मामा भीम गंझू मौजूद थे, जिन्होंने नम आंखों से प्लास्टिक में लिपटे रविंद्र की सड़ी-गली लाश को पंच तत्व में विलीन किया। इसमें मुखाग्नि देने की कर्मकांड बड़े भाई बिशु गंझू ने पूरा किया।

शव की अंत्येष्टि के बाद तीनों को राजमुंद्री रेलवे स्टेशन ले जाया गया, जहां से उन्हें गुरुवार को रांची हटिया के लिए रवाना किया जाएगा। इस पूरे प्रकरण में जहां एक ओर झारखंड सरकार की भूमिका सवालों के घेरे में है, वहीं कुछ सामाजिक संस्था, श्रमिक संघ बीएमएस और मानवाधिकार के अलावा आंध्र प्रदेश के पुलिस और रेल विभाग से जुड़े पदाधिकारी व कर्मियों ने मानवता का परिचय देते हुए मिसाल कायम की है। स्थानीय संस्थाओं ने परिवार को यहां तक भरोसा दिलाया है कि वे रविंद्र गंझू की मौत के मामले की तह तक जाएंगे। साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिसिया अनुसंधान से परिवार को अवगत कराते रहेंगे। इन सामाजिक संस्थाओं ने ही दिवंगत रविंद्र के भाई, बहन और मामा को वापस घर भेजने की व्यवस्था की है। यही नहीं, पोस्टमार्टम से लेकर अंतिम संस्कार तक सबों ने शोक संतप्त परिजनों के साथ खड़े रहे।

-- दिवंगत रविंद्र गंझू की मां से मिला आजसू का प्रतिनिधिमंडल

आजसू पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को दिवंगत रविंद्र गंझू की बुजुर्ग माता से मुलाकात कर ढाढस बंधाया। कहा की इस विषम परिस्थिति में आजसू परिवार उनके साथ खड़ा है। पतरातू प्रखंड सचिव विश्वरंजन सिन्हा ने रविंद्र की मौत पर शोक जताते हुए कहा कि ये झारखंड के लिए दुर्भाग्य की बात है कि आदिवासियों के हित की बात करने वाली सरकार ने मसले पर एक कदम भी नहीं बढ़ाया। साथ ही ये बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र के लिए भी ये दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि स्थानीय विधायक अंबा प्रसाद ने मामले पर चुप्पी साध ली, जबकि ये उनका फर्ज था कि रविंद्र का शव लाने की दिशा में वो पहल करती। विश्वरंजन सिन्हा ने कहा कि इस मामले पर आजसू गंभीर है। पार्टी हर हाल में दिवंगत रविंद्र गंझू को इंसाफ दिलाएगा। उन्होंने रविंद्र के मौत की उच्च स्तरीय जांच करवाने के साथ परिवार को अविलंब मुआवजा देने की मांग की। कहा कि यदि सरकार ने मामले की लीपापोती का प्रयास किया तो आजसू क्रमवार आंदोलन का बिगुल फूंकेगा। प्रतिनिधिमंडल में आजसू के जिला उपाध्यक्ष अनिल सोनी, बुद्धिजीवी मोर्चा के सचिव रोबिन मुखर्जी, युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष राज नायक आदि शामिल थे।

रविंद्र गंझू के साथ आंध्र प्रदेश जाने वालों का सुराग नहीं

भुरकुंडा हॉस्पिटल कॉलोनी निवासी 27 वर्षीय दिवंगत रविंद्र गंझू के साथ रोजगार की तलाश में आंध्रप्रदेश जाने वाले तीन लोगों को पुलिस अब तक नहीं ढूंढ पाई है। इसमें टंडवा थाना क्षेत्र के बाली ग्राम निवासी छगन गंझू के पुत्र तुलसी गंझू, सोमर गंझू के पुत्र कर्मा गंझू और राजू गंझू के पुत्र कालेश्वर गंझू शामिल हैं। इन तीनों के साथ रविंद्र गंझू 25 नवंबर को आंध्रप्रदेश के लिए रवाना हुआ था। चारो रांची हटिया से ट्रेन पकड़ कर 27 नवंबर को आंध्रप्रदेश पहुंचे थे। यहां राजमुंदरी स्टेशन पर उतरने के बाद से तुलसी, कर्मा और कालेश्वर लापता हो गए, जबकि रविंद्र का शव एलुरु जिला के कोयागुडम बस डिपो के पास 30 नवंबर को पड़ा हुआ पाया गया। जेब से बरामद मोबाइल फोन और आधार कार्ड से रविंद्र की शिनाख्त हो पाई थी।

यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें