बुढ़वा महादेव में रुद्र महायज्ञ का आज अंतिम दिन, हवन पूजन के साथ हुई पूर्णाहुति

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बुढ़वा महादेव में रुद्र महायज्ञ का आज अंतिम दिन, हवन पूजन के साथ हुई पूर्णाहुति

रामगढ़, हमारे प्रतिनिधि। छत्तरमांडू स्थित ऐतिहासिक और आस्था का प्रमुख केंद्र बुढ़वा महादेव धाम में नौ दिवसीय रुद्र महा यज्ञ का आज अंतिम दिन अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। पिछले नौ दिनों से जारी अनुष्ठानों, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों के बीच आज पूर्णाहुति को लेकर भक्तों का सैलाब देखने को मिला। शिव भक्तों की भीड़ के कारण पूरा क्षेत्र भक्ति, आध्यात्मिकता और आस्था से सराबोर दिखाई दिया। अंतिम दिन विशेष अनुष्ठानों की सूचना मिलते ही छत्तरमांडू, मांडू और आसपास के गांवों से हजारों की संख्या में भक्त बुढ़वा महादेव मंदिर परिसर पहुंचकर विशेष पूजन में शामिल हुए। साथ ही यज्ञ मंडप का दिनभर परिक्रमा किया।

मंदिर परिसर में सुबह चार बजे से ही शिवलिंग पर जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक का क्रम शुरू हो गया था।- वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन और पूर्णाहुति की तैयारीअंतिम दिन के लिए यज्ञ मंडप में विशेष हवन की व्यवस्था की गई थी। वहीं वैदिक आचार्यों की ओर से रुद्रपाठ और आहुति के मंत्रोच्चार ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया था। श्रद्धालुओं ने कल्याण, शांति, समृद्धि और वर्षा की प्रार्थना के साथ सामूहिक आहुति दी। साथ ही यज्ञ में क्षेत्र के कई प्रमुख श्रद्धालुओं ने भी मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। पंडितों के अनुसार, रुद्र महा यज्ञ का आयोजन न केवल व्यक्तिगत जीवन में शांति लाता है, बल्कि क्षेत्र की कृषि, वर्षा और सामाजिक समृद्धि से भी जुड़ा हुआ है।--भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समापिछले आठ दिनों की तरह अंतिम दिन भी सुबह से ही भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा। कलाकारों ने शिव तांडव स्तोत्र, शिव चालीसा, भजन, झांकी और जागरण सहित अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रात में दीप सज्जा, शृंगार और हर हर महादेव के जयकारों से पूरा परिसर जगमगा उठा था।वहीं सन्धाय आरती में भी हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।--श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वयंसेवक थे तैनातअंतिम दिन भीड़ को देखते हुए स्वयंसेवकों की विशेष टीम तैनात थे। प्रवेश और निकास मार्ग पर बैरिकेडिंग, वाहनों के लिए अलग पार्किंग व्यवस्था, पानी और प्रसाद की व्यवस्था की गई थी।--यज्ञ स्थल में लगे झूले और मेले थे आकर्षण का केंद्रयज्ञ के शुरू से ही यज्ञ स्थल में अलग-अलग तरह के लगे झूले मेले के कारण नाच्चों और महिलाओं को काफी आकर्षित कर रहा था। मेले में अलग-तरह के मिठाई और खाद्य सामग्री के अलावे खिलौने व श्रीनगर की दुकाने सजी थीं। जिससे वहां लोगों को भीड़ दिनभर उमड़ा रहता था।--आयोजन कर्ताओं ने दिया अहम योगदानआयोजन समिति ने बताया कि पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था में कोई कठिनाई नहीं आई। वहीं श्रद्धालुओं के लिए सभी दिन अलग-अलग भंडारे की व्यवस्था की गई थी। अंतिम दिन भी पूर्णाहुति के बाद भव्य भंडारा आयोजित किया गया। जिसमे हजारों लोगों ने भंडारे के महाप्रसाद पाया। भक्ति रस से सराबोर भक्तों ने खिचड़ी, पूड़ी-सब्जी, हलवा और अन्य प्रसाद का आनंद लिया। रुद्र महा यज्ञ में सेवा कार्य में स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया। जिसमे आयोजन कर्ता रामपदारथ सिंह, सुभाष सिंह, भोला सिंह, दिलीप सिंह, लौकेश सिंह शैलेश सिंह सहित अन्य लोगों ने अहम योगदान दिया।

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