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दया के सागर है भगवान कृष्ण : दीनदयाल महाराज

दया के सागर है भगवान कृष्ण : दीनदयाल महाराज

श्री श्री विष्णु महायज्ञ सह श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के अष्टम दिवस बुधवार की सुबह से ही यजन-पूजन-हवन का कार्य प्रारंभ हुआ। आचार्य पवन शास्त्री और कमलेश तिवारी ने वैदिक मंत्रोच्चार कर सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करवाया। वहीं दोपहर की तेज और कड़कड़ाती धूप में भी श्रद्धालुओं ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा कर आस्था का परिचय दिया। इधर मंगलवार देर शाम श्रीमद् भागवत कथा में पुतना वध और कृष्ण रूक्मणी विवाह पर जगदगुरु वनांचल धर्म-पीठाधीश्वर स्वामी दीनदयालजी महाराज ने प्रकाश डाला। उन्होंने कृष्ण-रुक्मिणी विवाह तक बड़ी ही रोचक तथा ज्ञानवर्धक कथा का वर्णन किया। पूतना वध प्रकरण पर बोलते हुये उन्होनें कहा कि भगवान इतने कृपालु है, दयालु हैं कि जो पूतना अपना हलाहल विषपान कराकर मारने की दृष्टि से आई, उस पूतना को भी भगवान ने धात्री की गती, माता की गती-स्थान प्रदान किया। जो गती माता देवकी और माता यशोदा को बड़ी साधना-सेवा से प्राप्त हुई, वह पूतना को सहज ही प्राप्त हो गई। वहीं वृंदावन से आई झांकी ने कृष्ण-रूक्मणी विवाह का मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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  • Web Title:Goddess of mercy, Lord Krishna: Deendayal Maharaj